राज्य सरकारें 21,600 करोड़ रुपये के प्रतिभूति नीलामी निर्गम की पेशकश करती हैं
भारत में राज्य स्तरीय उधारी कार्यक्रम के तहत नौ राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश 21,600 करोड़ रुपये के कुल अंकित मूल्य वाली प्रतिभूतियां नीलामी के जरिए बेचने की पेशकश करते हैं। यह नीलामी 16 जून 2026 को RBI के ई-कुबेर मंच पर होती है, जिसमें नई प्रतिभूतियों और पुनर्निर्गम, दोनों के जरिए धन जुटाया जाता है।
हाइलाइट्स
- आठ राज्यों की सरकारें 21,600 करोड़ रुपये की राज्य सरकार प्रतिभूतियों की नीलामी 16 जून 2026 को RBI की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से कराती हैं।
- निवेशक न्यूनतम 10,000 रुपये और उसके गुणकों में निवेश कर सकते हैं, तथा पात्र संस्थानों को अधिसूचित राशि का अधिकतम 10 प्रतिशत गैर-प्रतिस्पर्धी बोली योजना के तहत आवंटित किया जाएगा।
- प्रतिभूतियां SLR निवेश एवं ready forward सुविधा हेतु पात्र हैं, और नई प्रतिभूतियों पर ब्याज दरें RBI द्वारा नीलामी में निर्धारित की जाएंगी।
नीलामी संरचना और समय-सारिणी
Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तराखंड इस नीलामी में प्रतिभूतियां पेश करते हैं। कुल 21,600 करोड़ रुपये के इस निर्गम में अलग-अलग अवधि की नई उधारी के साथ कई मौजूदा State Government Securities के पुनर्निर्गम भी शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश, गुजरात, असम, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड नई प्रतिभूतियों के लिए यील्ड आधारित नीलामी लाते हैं, जबकि कई राज्यों ने पहले जारी प्रतिभूतियों के पुनर्निर्गम के लिए प्राइस आधारित नीलामी रखी है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, पंजाब, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर तथा आंध्र प्रदेश के कुछ निर्गम पूर्व में 2026 में जारी किए गए SGS के पुनर्निर्गम हैं।
प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी, दोनों तरह की बोलियां 16 जून 2026, मंगलवार को RBI Core Banking Solution, ई-कुबेर प्रणाली पर इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में जमा की जाती हैं। प्रतिस्पर्धी बोलियों का समय सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक है, जबकि गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां सुबह 10:30 बजे से 11:00 बजे तक जमा की जाती हैं।
नीलामी के नतीजे 16 जून 2026 को घोषित किए जाते हैं और सफल बोलीदाताओं को भुगतान 17 जून 2026, बुधवार को मुंबई तथा RBI के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों में बैंकिंग समय के दौरान करना होता है। केवल प्रणाली विफल होने की स्थिति में ही भौतिक बोलियां स्वीकार की जाती हैं।
निवेशकों के लिए प्रावधान और बैंकिंग प्रभाव
प्रत्येक प्रतिभूति की अधिसूचित राशि के अधिकतम 10 प्रतिशत तक का आवंटन पात्र व्यक्तियों और संस्थानों को गैर-प्रतिस्पर्धी बोली सुविधा योजना के तहत मिलता है। किसी एक प्रतिभूति में एकल बोली के लिए यह सीमा उसकी अधिसूचित राशि के अधिकतम 1 प्रतिशत तक रहती है, और खुदरा निवेशक Retail Direct पोर्टल के माध्यम से भी बोली लगा सकते हैं।न्यूनतम नाममात्र निवेश राशि 10,000 रुपये है और उसके बाद 10,000 रुपये के गुणकों में निवेश किया जा सकता है। बोलीदाता अपेक्षित वार्षिक यील्ड या मूल्य को दो दशमलव तक दर्ज करते हैं, और एक निवेशक एक ही राज्य की अधिसूचित राशि की सीमा के भीतर अलग-अलग दरों या मूल्यों पर एक से अधिक प्रतिस्पर्धी बोलियां दे सकता है।
नई प्रतिभूतियों पर ब्याज दरें नीलामी में RBI द्वारा निर्धारित की जाती हैं और इन पर हर वर्ष 17 दिसंबर तथा 17 जून को अर्धवार्षिक ब्याज देय होता है। पुनर्निर्गमित प्रतिभूतियों पर ब्याज मूल निर्गम की तिथि पर तय दर के अनुसार परिपक्वता तक अर्धवार्षिक आधार पर दिया जाता है।
ये प्रतिभूतियां Government Securities Act, 2006 और Government Securities Regulations, 2007 के प्रावधानों के अधीन रहती हैं। बैंकों के लिए इन निवेशों को Banking Regulation Act, 1949 की धारा 24 के तहत वैधानिक तरलता अनुपात, SLR, हेतु पात्र सरकारी प्रतिभूति निवेश माना जाता है, और ये प्रतिभूतियां ready forward सुविधा के लिए भी योग्य रहती हैं।
सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए RBI और केंद्र सरकार के कदमों पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि एफपीआई को सरकारी बॉन्ड पर ब्याज आय और पूंजीगत लाभ में कर राहत दी गई, और Fully Accessible Route के दायरे का विस्तार किया गया। उस लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने के लिए FCNR(B) जमा और फॉरेक्स स्वैप विंडो जैसी व्यवस्थाएं बढ़ाई गईं, जिनसे भुगतान संतुलन और बैंकिंग फंडिंग दबाव कम करने की उम्मीद है।
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