RBI ने Repco Home Finance पर नियामकीय अनुपालन चूक के लिए 70,000 रुपये का जुर्माना लगाया

RBI ने Repco Home Finance पर नियामकीय अनुपालन चूक के लिए 70,000 रुपये का जुर्माना लगाया
Repco Home पर RBI जुर्माना

आवास वित्त क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन पर निगरानी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने Repco Home Finance Limited पर फेयर प्रैक्टिस कोड से जुड़ी चूक के लिए 70,000 रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है। यह आदेश 5 जून 2026 का है और यह कार्रवाई कंपनी की ग्राहक उधार दरों के जोखिम-आधारित अंतर के खुलासे में कमी से जुड़ी है।

हाइलाइट्स

  • RBI ने Repco Home Finance पर 'Fair Practice Code' निर्देशों के उल्लंघन के लिए National Housing Bank Act, 1987 की धारा 52A के तहत 70,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
  • 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के निरीक्षण में कंपनी के आवेदन प्रपत्रों व स्वीकृति पत्रों में जोखिम श्रेणी व ब्याज दर खुलासे की कमी पाई गई।
  • RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय अनुपालन में कमियों को लेकर है और ग्राहकों से लेनदेन की वैधता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

निरीक्षण, आदेश और उल्लंघन का आधार

भारतीय रिजर्व बैंक की 5 जून 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह दंड National Housing Bank Act, 1987 की धारा 52A के तहत लगाया गया है। मामला उन निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा है जो RBI ने 'Fair Practice Code' के तहत जारी किए थे।

National Housing Bank ने कंपनी का वैधानिक निरीक्षण 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया था। पर्यवेक्षी निष्कर्षों और इस संबंध में पत्राचार के आधार पर कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसमें पूछा गया कि निर्देशों का पालन न करने पर उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।

RBI ने कंपनी के लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद यह पाया कि कंपनी ने आवेदन प्रपत्रों और स्वीकृति पत्रों में जोखिम के श्रेणीकरण की पद्धति तथा अलग-अलग श्रेणी के उधारकर्ताओं से अलग ब्याज दर वसूलने के औचित्य का खुलासा नहीं किया। इसी आरोप को सिद्ध मानते हुए मौद्रिक दंड लगाया गया।

आवास वित्त क्षेत्र पर अनुपालन का संकेत

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी तथा उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर टिप्पणी करना नहीं है। RBI ने यह भी कहा है कि यह मौद्रिक दंड उसके द्वारा आगे की जाने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना लगाया गया है।

यह कदम आवास वित्त कंपनियों के लिए ग्राहक प्रकटीकरण मानकों के महत्व को रेखांकित करता है, खासकर उन मामलों में जहां उधारकर्ताओं की जोखिम श्रेणी के आधार पर ब्याज दरें अलग तय की जाती हैं। ऐसे खुलासे आवेदन और स्वीकृति दस्तावेजों में स्पष्ट रखना उधार मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुरुग्राम की Oyster Grande परियोजना में फ्लैट आवंटन रद्द होने से जुड़े उपभोक्ता विवाद पर हमारी पिछली रिपोर्ट में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश को रेखांकित किया गया था, जिसमें Adani M2K Projects LLP को खरीदारों को करीब 49.7 लाख रुपये ब्याज समेत लौटाने का निर्देश दिया गया। उस आदेश में आयोग ने भुगतान को शर्तों के साथ स्वीकार कर बाद में उन शर्तों से इनकार करने को अनुचित माना, जिससे आवास क्षेत्र में खरीदारों के अधिकार, अनुबंधीय शर्तों और राहत के मानकों पर अहम संकेत मिलता है।

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