True Credits पर KYC उल्लंघन के लिए RBI ने 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में अनुपालन निगरानी के तहत True Credits Private Limited पर 3.10 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई 5 जून 2026 के आदेश के तहत की गई, जिसमें कुछ ग्राहकों के लिए गैर-आमने-सामने माध्यम से ऑनबोर्डिंग के दौरान उन्नत ड्यू डिलिजेंस उपाय नहीं अपनाने का मामला शामिल है।
हाइलाइट्स
- RBI ने KYC दिशानिर्देशों के उल्लंघन पर True Credits पर 3.10 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया।
- जांच में पाया गया कि True Credits ने डिजिटल/गैर-आमने-सामने कस्टमर ऑनबोर्डिंग में Enhanced Due Diligence उपायों का पालन नहीं किया।
- RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सिर्फ नियामकीय कमियों पर आधारित है और अगले संभावित एक्शन को प्रभावित नहीं करती।
जुर्माने की वजह और नियामकीय प्रक्रिया
RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह दंड 'Reserve Bank of India (Know Your Customer (KYC)) Directions' के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन पर लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने यह कार्रवाई Reserve Bank of India Act, 1934 की धारा 58G(1)(b) और धारा 58B(5)(aa) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए की है।
RBI ने कंपनी का वैधानिक निरीक्षण 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया था। पर्यवेक्षी निष्कर्षों और संबंधित पत्राचार के आधार पर कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद उसके लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई में मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार किया गया।
जांच के बाद RBI ने पाया कि कंपनी गैर-आमने-सामने तरीके से जोड़े गए कुछ ग्राहकों के लिए Enhanced Due Diligence, EDD, उपाय करने में विफल रही। इसी आरोप को कायम मानते हुए मौद्रिक दंड लगाया गया।
NBFC अनुपालन पर असर
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी तथा उसके ग्राहकों के बीच किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय देना नहीं है। RBI ने यह भी कहा कि यह जुर्माना भविष्य में की जा सकने वाली किसी अन्य कार्रवाई को प्रभावित नहीं करता।यह कदम संकेत देता है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए KYC और ग्राहक सत्यापन प्रक्रियाओं, खासकर डिजिटल या गैर-आमने-सामने ऑनबोर्डिंग में, नियामकीय अपेक्षाएं सख्त बनी हुई हैं। ऐसे मामलों में उन्नत जांच उपायों का पालन अब भी क्षेत्रीय अनुपालन ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार और RBI के कदमों पर चर्चा की गई थी, जिनमें FPI के लिए सरकारी बॉन्ड निवेश पर कर राहत, Fully Accessible Route का विस्तार और विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने के उपाय शामिल थे। लेख में यह भी बताया गया था कि इन नीतिगत कदमों का उद्देश्य भुगतान संतुलन के दबाव और बैंकिंग फंडिंग की चुनौतियों को कम करना है, हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी जरूरत के मुकाबले आंशिक समाधान हो सकता है।
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