RBI ने IIFL Samasta Finance पर KYC और धोखाधड़ी प्रकटीकरण उल्लंघनों के लिए जुर्माना लगाया
भारतीय रिजर्व बैंक ने नियामकीय अनुपालन में कमियों के मामले में IIFL Samasta Finance Limited पर 3.90 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई 5 जून 2026 के आदेश के तहत की गई है और इसमें KYC दिशानिर्देशों तथा NBFCs के लिए धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन नियमों के उल्लंघन शामिल हैं।
हाइलाइट्स
- RBI ने IIFL Samasta Finance पर KYC नियंत्रण और धोखाधड़ी प्रकटीकरण नियम उल्लंघन का दोषी मानते हुए मौद्रिक दंड लगाया।
- कंपनी संदिग्ध लेनदेन की निगरानी के लिए मजबूत सॉफ़्टवेयर व्यवस्था स्थापित करने और FY 2024-25 के धोखाधड़ी विवरण के सही प्रकटीकरण में विफल रही।
- यह नियामकीय कार्रवाई NBFC क्षेत्र में KYC, वित्तीय रिपोर्टिंग और जोखिम प्रबंधन मानकों के अनुपालन की जांच को और सख्त बनाएगी।
निरीक्षण के निष्कर्ष और दंड का आधार
भारतीय रिजर्व बैंक की 5 जून 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह जुर्माना RBI Act, 1934 की धारा 58G(1)(b) और धारा 58B(5)(aa) के तहत लगाया गया है। कार्रवाई कंपनी की 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किए गए वैधानिक निरीक्षण और उसके बाद की पर्यवेक्षी जांच पर आधारित है।
RBI ने गैर-अनुपालन से जुड़े निष्कर्षों और संबंधित पत्राचार के आधार पर कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी के जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद केंद्रीय बैंक ने आरोपों को सही पाया और मौद्रिक दंड लगाने का निर्णय लिया।
नियामक के अनुसार, कंपनी संदिग्ध लेनदेन की प्रभावी पहचान और रिपोर्टिंग के लिए मजबूत सॉफ्टवेयर व्यवस्था स्थापित करने में विफल रही। इसके अलावा, कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रिपोर्ट किए गए धोखाधड़ी मामलों का सही विवरण वित्तीय विवरणों के नोट्स टू अकाउंट्स में प्रकट नहीं किया।
NBFC क्षेत्र पर नियामकीय असर
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी तथा उसके ग्राहकों के बीच किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर टिप्पणी करना नहीं है। RBI ने यह भी कहा है कि यह मौद्रिक दंड भविष्य में की जा सकने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना लगाया गया है।यह कदम NBFC क्षेत्र के लिए KYC नियंत्रण, संदिग्ध लेनदेन निगरानी और धोखाधड़ी प्रकटीकरण मानकों के महत्व को रेखांकित करता है। ऐसे मामलों में नियामकीय जांच केवल प्रक्रियात्मक अनुपालन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वित्तीय रिपोर्टिंग की शुद्धता और जोखिम प्रबंधन प्रणालियों की मजबूती को भी सीधे परखती है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार और आरबीआई के उपायों पर चर्चा की गई थी, जिनमें एफपीआई के लिए सरकारी बॉन्ड पर कर राहत, Fully Accessible Route का विस्तार और FCNR(B) व फॉरेक्स स्वैप विंडो जैसे तरलता समर्थन कदम शामिल थे। लेख में यह भी बताया गया था कि इन पहलों से भुगतान संतुलन और बैंकिंग फंडिंग पर दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है, हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह संरचनात्मक चुनौतियों का केवल आंशिक समाधान है।
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