Ashutosh Sureka

RBI ने वलसाड महिला नागरिक सहकारी बैंक पर नियामकीय निर्देशों की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ाई

RBI ने वलसाड महिला नागरिक सहकारी बैंक पर नियामकीय निर्देशों की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ाई
RBI निर्देशों की अवधि बढ़ी

गुजरात के वलसाड स्थित The Valsad Mahila Nagrik Sahakari Bank Ltd. पर लागू नियामकीय प्रतिबंध अब 18 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहते हैं। यह विस्तार पहले से लागू छह महीने की अवधि समाप्त होने से पहले किया गया है और बैंक की वित्तीय स्थिति पर केंद्रीय बैंक की संतुष्टि का संकेत नहीं देता।

हाइलाइट्स

  • RBI ने The Valsad Mahila Nagrik Sahakari Bank Ltd., वलसाड पर नियामकीय निर्देशों की अवधि 18 सितंबर 2026 तक बढ़ाई।
  • RBI ने स्पष्ट किया कि इस विस्तार का अर्थ बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट होना नहीं है, निगरानी अभी भी जारी है।
  • संबंधित सभी नियम और शर्तें पूर्ववत कायम रहेंगी, विस्तार एहतियाती पर्यवेक्षण और सतत नियामकीय नियंत्रण का संकेत है।

निर्देशों के विस्तार की अवधि और दायरा

RBI की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/456 के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A को धारा 56 के साथ पढ़ते हुए The Valsad Mahila Nagrik Sahakari Bank Ltd., वलसाड, गुजरात पर लागू निर्देशों की अवधि को आगे बढ़ाया है। पहले 17 दिसंबर 2025 के निर्देश के तहत ये प्रतिबंध 18 जून 2026 के कारोबार बंद होने तक छह महीने के लिए लागू थे।

अब RBI ने इन्हें 18 जून 2026 के कारोबार बंद होने के बाद से अगले तीन महीने के लिए, 18 सितंबर 2026 के कारोबार बंद होने तक, समीक्षा के अधीन बढ़ा दिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि सार्वजनिक हित में इन निर्देशों का जारी रहना आवश्यक है।

बैंकिंग क्षेत्र और जमाकर्ताओं के लिए संकेत

RBI ने स्पष्ट किया है कि इस विस्तार या किसी संशोधन को अपने आप में यह नहीं माना जाना चाहिए कि वह बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है। इसका अर्थ है कि नियामकीय निगरानी अभी भी जारी है और यह कदम एहतियाती पर्यवेक्षण के दायरे में आता है।

संदर्भित निर्देशों की अन्य सभी शर्तें और नियम बिना बदलाव के लागू रहते हैं। सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में ऐसे विस्तार आम तौर पर नियामकीय नियंत्रण, परिचालन सीमाओं और जोखिम प्रबंधन पर लगातार निगरानी का संकेत देते हैं, खासकर जब किसी बैंक की स्थिति की समीक्षा जारी हो।

विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए RBI और सरकार के उपायों पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि रुपये के दबाव और एफपीआई निकासी के बीच सरकारी बॉन्ड पर कर राहत, Fully Accessible Route का विस्तार और विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए। इसमें FCNR(B) जमा पर हेजिंग लागत वहन करने और फॉरेक्स स्वैप विंडो बढ़ाने जैसे उपायों का भी उल्लेख था, जिनका उद्देश्य भुगतान संतुलन और बैंकिंग फंडिंग पर दबाव कम करना था।

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