RBI ने ट्रेजरी बिल नीलामी में 24,000 करोड़ रुपये जुटाए
भारतीय मनी मार्केट में अल्पकालिक सरकारी उधारी के तहत 91-दिवसीय, 182-दिवसीय और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिलों की ताजा नीलामी पूरी होती है। इस प्रक्रिया में कुल 24,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बोलियां आती हैं, जिससे अल्पकालिक प्रतिफल स्तर और निवेशक मांग का संकेत मिलता है।
हाइलाइट्स
- RBI ने ट्रेजरी बिल नीलामी से कुल 24,000 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें 91-दिवसीय के लिए 5.2603%, 182-दिवसीय के लिए 5.5005% और 364-दिवसीय के लिए 5.7887% कट-ऑफ प्रतिफल रहा।
- तीनों अवधियों में प्रतिस्पर्धी बोलियों की मांग अधिसूचित राशि से कई गुना ज्यादा रही, 91-दिवसीय में 32,155.700 करोड़, 182-दिवसीय में 13,949.650 करोड़ और 364-दिवसीय में 31,465.000 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं।
- नीलामी के नतीजे दर्शाते हैं कि यील्ड कर्व क्रमशः ऊंचा होता गया, जिससे बाजार में लंबी अल्पकालिक परिपक्वता कागजों के लिए उच्च प्रतिफल की अपेक्षा दिखती है।
नीलामी के नतीजे और प्रतिफल स्तर
Reserve Bank of India की Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति 2026-2027/475 के अनुसार, 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल के लिए 12,000 करोड़ रुपये, 182-दिवसीय ट्रेजरी बिल के लिए 6,000 करोड़ रुपये और 364-दिवसीय ट्रेजरी बिल के लिए 6,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि तय की जाती है। तीनों अवधियों में प्रतिस्पर्धी बोलियों की कुल मांग अधिसूचित राशि से काफी ऊपर रहती है।91-दिवसीय ट्रेजरी बिल में 110 प्रतिस्पर्धी बोलियां 32,155.700 करोड़ रुपये की प्राप्त होती हैं, जिनमें 59 बोलियां स्वीकार की जाती हैं और 11,400 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं। इसका कट-ऑफ मूल्य 98.7055 और प्रतिफल 5.2603% रहता है, जबकि भारित औसत मूल्य 98.7088 और भारित औसत प्रतिफल 5.2467% दर्ज होता है.
182-दिवसीय ट्रेजरी बिल में 68 प्रतिस्पर्धी बोलियां 13,949.650 करोड़ रुपये की मिलती हैं, जिनमें 28 बोलियां स्वीकार होती हैं और 5,700 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं। इसका कट-ऑफ मूल्य 97.3305, प्रतिफल 5.5005%, भारित औसत मूल्य 97.3376 और भारित औसत प्रतिफल 5.4855% रहता है.
364-दिवसीय ट्रेजरी बिल में 115 प्रतिस्पर्धी बोलियां 31,465.000 करोड़ रुपये की आती हैं, लेकिन केवल 3 बोलियां स्वीकार होती हैं और 5,700 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं। इस श्रेणी में कट-ऑफ मूल्य 94.5422, प्रतिफल 5.7887%, भारित औसत मूल्य 94.5494 और भारित औसत प्रतिफल 5.7807% दर्ज होता है।
मांग का रुझान और बाजार पर असर
आंकड़े दिखाते हैं कि तीनों परिपक्वता अवधियों में निवेशक मांग मजबूत रहती है, खासकर 91-दिवसीय और 364-दिवसीय कागज में, जहां प्राप्त प्रतिस्पर्धी बोलियां अधिसूचित राशि से कई गुना ऊपर पहुंचती हैं। इससे संकेत मिलता है कि बैंक, संस्थागत निवेशक और अन्य पात्र प्रतिभागी अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियों में सक्रिय रुचि बनाए रखते हैं।आंशिक आवंटन केवल एक-एक प्रतिस्पर्धी बोली में होता है, जहां 91-दिवसीय के लिए 9.5800%, 182-दिवसीय के लिए 19.0500% और 364-दिवसीय के लिए 11.6667% का आवंटन प्रतिशत दर्ज होता है। गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में भी मांग बनी रहती है, जिसमें 91-दिवसीय के लिए 4,000 करोड़ रुपये, 182-दिवसीय के लिए 1,100 करोड़ रुपये और 364-दिवसीय के लिए 1,450 करोड़ रुपये स्वीकार किए जाते हैं।
प्रतिफल संरचना में 91-दिवसीय से 364-दिवसीय अवधि तक क्रमिक बढ़त दिखती है, जो लंबी अल्पकालिक परिपक्वता पर ऊंचे यील्ड की बाजार अपेक्षा को दर्शाती है। यह नीलामी परिणाम निकट अवधि की सरकारी उधारी लागत और घरेलू दरों के रुझान के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में काम करता है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में RBI और सरकार द्वारा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की गई थी, जैसे सरकारी बॉन्ड पर विदेशी निवेशकों के लिए कर छूट, Fully Accessible Route का विस्तार और FCNR(B)/फॉरेक्स स्वैप जैसी तरलता बढ़ाने की पहलें। इसमें यह भी बताया गया था कि इन उपायों से भुगतान संतुलन और फंडिंग दबाव कुछ हद तक कम हो सकते हैं, हालांकि विदेशी पोर्टफोलियो बहिर्वाह और रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियां बनी रह सकती हैं।
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