Ashutosh Sureka

RBI ने Gauhati Co-operative Urban Bank पर नियामकीय निर्देश 17 सितंबर 2026 तक बढ़ाए

RBI ने Gauhati Co-operative Urban Bank पर नियामकीय निर्देश 17 सितंबर 2026 तक बढ़ाए
RBI निर्देशों में विस्तार

गुवाहाटी स्थित सहकारी बैंक पर पहले से लागू नियामकीय पाबंदियां अब तीन महीने और जारी रहती हैं। यह विस्तार 17 जून 2026 के कारोबारी समापन के बाद से 17 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहता है और इसकी समीक्षा आगे की जाती है।

हाइलाइट्स

  • RBI ने The Gauhati Co-operative Urban Bank Ltd., Guwahati पर लागू नियामकीय निर्देशों की अवधि 17 सितंबर 2026 तक तीन महीने के लिए बढ़ा दी।
  • यह विस्तार समीक्षा के अधीन रहेगा और इसका अर्थ यह नहीं है कि RBI बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है।
  • निर्देशों के विस्तार से असम के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में नियामकीय निगरानी जारी रहती है और बैंक की वर्तमान परिचालन शर्तें बनी रहेंगी।

निर्देशों के विस्तार का दायरा और समयसीमा

Reserve Bank of India की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय बैंक The Gauhati Co-operative Urban Bank Ltd., Guwahati पर बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A को धारा 56 के साथ पढ़ते हुए लागू निर्देशों की अवधि बढ़ाता है। ये निर्देश मूल रूप से 17 दिसंबर 2025 को जारी किए गए थे और छह महीने के लिए 17 जून 2026 तक लागू थे।

अब RBI इन्हें 17 जून 2026 के कारोबारी समापन से 17 सितंबर 2026 के कारोबारी समापन तक अतिरिक्त तीन महीने के लिए बढ़ाता है। केंद्रीय बैंक कहता है कि यह कदम जनहित में आवश्यक है और यह विस्तार समीक्षा के अधीन रहता है।

बैंक की वित्तीय स्थिति पर संकेत और क्षेत्रीय असर

RBI स्पष्ट करता है कि इस विस्तार या किसी संशोधन को अपने आप में इस रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि वह बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है। संदर्भित निर्देश की बाकी सभी शर्तें और नियम बिना बदलाव के लागू रहते हैं।

यह कदम असम के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में नियामकीय निगरानी के बने रहने का संकेत देता है। ग्राहकों, जमाकर्ताओं और स्थानीय वित्तीय तंत्र के लिए इसका अर्थ यह है कि बैंक पर लागू मौजूदा परिचालन शर्तें फिलहाल जारी रहती हैं, जबकि RBI आगे की समीक्षा के आधार पर अगला निर्णय लेता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में RBI और सरकार द्वारा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की गई थी, जैसे Fully Accessible Route का विस्तार, सरकारी बॉन्ड पर FPI के लिए कर छूट और FCNR(B) जमा/फॉरेक्स स्वैप जैसी विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने की पहलें। उस लेख में यह भी बताया गया था कि इन उपायों से भुगतान संतुलन और बैंकिंग फंडिंग दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है, हालांकि विदेशी पोर्टफोलियो निकासी और रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियाँ बनी रह सकती हैं।

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