भारत की सेवा व्यापार प्राप्तियां सितंबर में बढ़ीं, RBI ने आयात भुगतान के अंतरिम आंकड़े जारी किए

भारत की सेवा व्यापार प्राप्तियां सितंबर में बढ़ीं, RBI ने आयात भुगतान के अंतरिम आंकड़े जारी किए
सेवा व्यापार में तेजी

भारत के सेवा व्यापार के सितंबर 2026 के अंतरिम आंकड़े निर्यात प्राप्तियों में मासिक आधार पर तेज बढ़ोतरी दिखाते हैं। इसी अवधि में आयात भुगतान अगस्त से ऊपर जाता है, जबकि जुलाई से सितंबर तक के सभी आंकड़ों को अस्थायी बताया गया है।

हाइलाइट्स

  • सितंबर 2026 में भारत की सेवा निर्यात प्राप्तियां 39,305 मिलियन U.S. डॉलर और आयात भुगतान 20,097 मिलियन U.S. डॉलर रही, अगस्त से वृद्धि दिखी।
  • सेवा निर्यात प्राप्तियों की वार्षिक वृद्धि दर सितंबर में 7.2% और आयात भुगतान की 12.6% रही, अगस्त की तुलना में दोनों ही दरें कम रहीं।
  • RBI ने जुलाई-सितंबर 2026 के सेवा व्यापार आंकड़ों को अस्थायी बताया और उल्लेख किया कि ये भारत के विदेशी मुद्रा प्रवाह के रुझानों के लिए अहम हैं।

सितंबर के सेवा व्यापार आंकड़े

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, सितंबर 2026 में सेवाओं के निर्यात से प्राप्तियां 39,305 मिलियन U.S. डॉलर और आयात भुगतान 20,097 मिलियन U.S. डॉलर रहता है। यह अगस्त 2026 के 35,471 मिलियन U.S. डॉलर के निर्यात और 18,934 मिलियन U.S. डॉलर के आयात भुगतान से अधिक है.

जुलाई 2026 में सेवा निर्यात प्राप्तियां 38,253 मिलियन U.S. डॉलर और आयात भुगतान 20,606 मिलियन U.S. डॉलर दर्ज होता है। सितंबर के लिए तालिका में निर्यात प्राप्तियों की वार्षिक वृद्धि दर 7.2% और आयात भुगतान की 12.6% दी गई है, जबकि अगस्त में यह क्रमशः 13.7% और 21.4% रहती है।

रुझान और आर्थिक महत्व

जुलाई से सितंबर 2026 की अवधि के लिए RBI इन आंकड़ों को अस्थायी बताता है। केंद्रीय बैंक यह भी कहता है कि कोष्ठकों में दिए गए वृद्धि दर के आंकड़े पिछले वर्ष के समान महीने की तुलना में हैं और इन्हें भुगतान संतुलन सांख्यिकी के आधार पर संशोधित किया गया है.

ये आंकड़े भारत के बाह्य क्षेत्र में सेवा क्षेत्र के योगदान और विदेशी मुद्रा प्रवाह की दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। सेवा निर्यात प्राप्तियों में सितंबर की बढ़त ऐसे समय में सामने आती है जब सेवा क्षेत्र भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शन में एक प्रमुख सहारा बना रहता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा का सार बताया गया था, जिसमें FY27 के लिए GDP वृद्धि और CPI महंगाई के अनुमान बढ़ाने, रेपो दर को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5% करने और नीतिगत रुख को सख्त करने पर चर्चा हुई थी। लेख में खाद्य व ईंधन महंगाई, कमजोर मानसून और ऊंची जिंस कीमतों जैसे जोखिमों के साथ-साथ तरलता खींचने और रुपये को स्थिर रखने के लिए ओएमओ बिक्री व अन्य कदमों का भी उल्लेख था।

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