लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर भाजपा ने प्रक्रिया पालन पर जोर दिया
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए लाए गए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिन की बहस के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में कहा कि स्पीकर के फैसले असहमति के बावजूद बाध्यकारी होते हैं और उन पर संदेह नहीं किया जा सकता। वित्तीय एक्सप्रेस के मुताबिक, शाह ने इसे संसदीय राजनीति के लिए ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि करीब चार दशक बाद पहली बार लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया है।
हाइलाइट्स
- कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव को 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन मिला और चर्चा के लिए 10 घंटे आवंटित किए गए।
- अमित शाह ने सदन को बताया कि स्पीकर को संविधान के तहत निर्विरोध मध्यस्थ रहना चाहिए और नियमों का उल्लंघन अस्वीकार्य है।
- शाह ने विपक्षी नेताओं की संसद में उपस्थिति और व्यवहार पर सवाल उठाए, राहुल गांधी की उपस्थित राष्ट्रीय औसत से नीचे बताई।
अविश्वास प्रस्ताव, बहस का समय और समर्थन
अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन बताया गया है। The Financial Express के अनुसार, कुल 118 विपक्षी सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए और स्पीकर पर “पक्षपातपूर्ण व्यवहार” का आरोप लगाया। अध्यक्षता कर रहे भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने प्रस्ताव को अनुमति दी और बहस के लिए 10 घंटे आवंटित किए, साथ ही सदस्यों से प्रस्ताव के विषय पर केंद्रित रहने का आग्रह किया। इस पूरे घटनाक्रम को विपक्ष की तरफ से स्पीकर कार्यालय की अपेक्षित निष्पक्षता से जोड़कर देखा गया है।शाह का तर्क, स्पीकर की भूमिका और नियमों पर जोर
अमित शाह ने सदन में कहा कि स्पीकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘तटस्थ संरक्षक’ होते हैं और उनकी भूमिका संविधान के तहत मध्यस्थ की है। उन्होंने यह भी कहा कि स्पीकर के निर्णयों का सम्मान इसलिए जरूरी है ताकि वे स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें और सदन की मर्यादा बनाए रखना उनका दायित्व है। शाह ने सदन को “बाजार” नहीं बताते हुए कहा कि कार्यवाही पारस्परिक विश्वास और तय नियमों के आधार पर चलती है, तथा नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि वेल में आना, कागज फाड़ना और स्पीकर की कुर्सी की ओर फेंकना स्पीकर को अपमानित करने का प्रयास है।विपक्ष पर राजनीतिक हमला और उपस्थिति का मुद्दा
शाह ने विपक्षी नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जैसे वरिष्ठ नेता उन्हें क्या करना है, यह सिखाएं, और इसी संदर्भ में शशि थरूर का उल्लेख किया। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष की उपस्थिति राष्ट्रीय औसत से नीचे है। साथ ही, संसद सत्र के दौरान विदेश यात्रा को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि विपक्ष को सदन की प्रक्रिया का पालन करना होगा। शाह ने यह दावा किया कि भाजपा लंबे समय तक विपक्ष में रही है, लेकिन उसने कभी स्पीकर के खिलाफ ऐसा अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया, जबकि अतीत में ऐसे प्रस्ताव तीन बार पेश किए जाने का उल्लेख उन्होंने किया।हमने पहले पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग तथा ममता बनर्जी के बीच बढ़े टकराव पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में सीईसी के कथित तौर पर अधिकारियों से धमकी भरे लहजे में बात करने के आरोप, कानून-व्यवस्था व चुनावी निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश, और एसआईआर को लेकर मतदान अधिकारों पर उठी आपत्तियों का जिक्र था।
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