वेदांता संयंत्र विस्फोट मामले में एफआईआर पर विवाद के बीच नवीन जिंदल ने साक्ष्य-आधारित जांच की वकालत की
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता के पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए घातक विस्फोट के बाद कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल को एफआईआर में नामित किए जाने पर कारोबारी और सांसद नवीन जिंदल उनका बचाव कर रहे हैं। मरने वालों की संख्या 23 तक पहुंचने के बीच जिंदल पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा और आजीविका सहायता के साथ पहले जांच, फिर साक्ष्य के आधार पर जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
हाइलाइट्स
- वेदांता संयंत्र बॉयलर विस्फोट 14 अप्रैल को अत्यधिक ईंधन जमाव के कारण हुआ, प्रारंभिक जांच में रखरखाव में कमी और संचालन विफलताओं का संकेत मिला।
- एफआईआर में अनिल अग्रवाल समेत कई लोगों पर लापरवाही से मौत और मशीनरी के गलत प्रबंधन के आरोप लगे, दो और घायलों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी।
- नवीन जिंदल ने जांच में निष्पक्षता की मांग करते हुए निजी व सार्वजनिक क्षेत्र के लिए एक समान उत्तरदायित्व और साक्ष्य-आधारित जवाबदेही पर जोर दिया।
विस्फोट, एफआईआर और जिंदल की प्रतिक्रिया
Financial Express के अनुसार, नवीन जिंदल ने एक्स पर कहा कि यह त्रासदी बेहद पीड़ादायक है और प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा, आजीविका सहायता तथा विस्तृत जांच अनिवार्य है। उन्होंने अनिल अग्रवाल को एफआईआर में जल्दबाजी में नामित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि संयंत्र के संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और जिम्मेदारी साक्ष्य के आधार पर तय होनी चाहिए।
जिंदल ने यह भी कहा कि जब सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या रेलवे में हादसे होते हैं, तब क्या सीधे चेयरमैन का नाम लिया जाता है। उनके अनुसार, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के लिए जवाबदेही का एक समान मानदंड लागू होना चाहिए, क्योंकि निवेशकों का भरोसा निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित न्याय पर टिका है।
प्रारंभिक जांच और राजनीतिक दबाव
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल को दोपहर करीब 2:30 बजे बॉयलर-01 में अत्यधिक ईंधन जमाव से दबाव बढ़ने के बाद आग और विस्फोट हुआ। मुख्य बॉयलर निरीक्षक की प्रारंभिक रिपोर्ट और सक्ती जिले की एफएसएल जांच में रखरखाव में कमी तथा संचालन संबंधी विफलताओं की ओर संकेत किया गया है, जिनमें वेदांता और एनजीएसएल की भूमिका का उल्लेख है।हाल में दो और घायलों की मौत हो चुकी है, जिनमें पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर के सुभ्रत जना और झारखंड के गढ़वा के उपेंद्र साह शामिल हैं। तीन श्रमिक अब भी गंभीर हैं और नौ अन्य रायपुर तथा रायगढ़ के अस्पतालों में निगरानी में हैं।
एफआईआर में अनिल अग्रवाल, प्रबंधक देवेंद्र पटेल और अन्य के खिलाफ लापरवाही से मौत और मशीनरी के गलत प्रबंधन से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। विपक्ष के नेता चरण दास महंत न्यायिक जांच, अधिक कड़ी आपराधिक धाराओं, राज्य के बाहर विशेष उपचार व्यवस्था और छत्तीसगढ़ में समर्पित बर्न अस्पताल की मांग कर रहे हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत की श्रमबल भागीदारी दर के मार्च में 41.9% तक गिरने और महिला श्रमबल भागीदारी व खासकर शहरी युवा महिलाओं की ऊंची बेरोजगारी पर फोकस किया गया था। उस लेख में बताया गया था कि रोजगार बाजार में सुधार असमान है और महिलाओं तथा युवाओं पर केंद्रित रोजगार रणनीतियों की जरूरत बढ़ रही है।
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