लोकसभा परिसीमन विधेयक पर भाजपा का बचाव, दक्षिणी राज्यों की सीटें बरकरार रहने का दावा

लोकसभा परिसीमन विधेयक पर भाजपा का बचाव, दक्षिणी राज्यों की सीटें बरकरार रहने का दावा
परिसीमन विधेयक पर विवाद

लोकसभा में पेश किए गए परिसीमन विधेयक 2026 पर राजनीतिक टकराव तेज है, जबकि सरकार और भाजपा सांसद इसे संवैधानिक अनिवार्यता के रूप में पेश कर रहे हैं। बहस का केंद्र दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व, 850 सदस्यीय नई लोकसभा की संरचना और महिला आरक्षण के साथ सीट पुनर्वितरण के प्रभाव पर है।

हाइलाइट्स

  • भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने लोकसभा में कहा कि परिसीमन प्रस्ताव के तहत दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें घटने की आशंका निराधार है और उनकी हिस्सेदारी 23.7% पर बनी रहेगी।
  • 131वां संविधान संशोधन, परिसीमन विधेयक 2026, व केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश हुए, जिसमें 207 सांसदों ने समर्थन और 126 ने विरोध में मतदान किया।
  • संसद में 850 सदस्यीय लोकसभा के प्रस्ताव से प्रतिनिधित्व संरचना, महिला आरक्षण और संघीय राजनीतिक संतुलन पर शुक्रवार शाम 4 बजे मतदान होगा, जिससे राजनीतिक परिदृश्य बदल सकता है।

संसदीय बहस में विधेयक का गणितीय बचाव

Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने गुरुवार को लोकसभा में परिसीमन exercise का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि प्रस्तावित ढांचे में दक्षिणी राज्यों की सीटें घटने का डर निराधार है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 के अनुरूप है और 2001 में 84वें संशोधन के तहत लगी रोक 2026 में समाप्त होने के बाद अब जमीनी वास्तविकताओं को परिलक्षित करना आवश्यक है।

सूर्या ने कहा कि यदि परिसीमन केवल 2011 की जनगणना के आधार पर सख्ती से किया जाता, तो तमिलनाडु को विधेयक में प्रस्तावित 59 सीटें नहीं मिलतीं और आंध्र प्रदेश का आवंटन लगभग 27 सीटों के आसपास बैठता। उनका तर्क था कि वैकल्पिक गणना पद्धतियों में भी परिणाम मोटे तौर पर समान रहेंगे, जबकि दक्षिणी राज्यों की कुल लोकसभा हिस्सेदारी करीब 23.7% पर बनी रहने की अपेक्षा है।

उन्होंने यह भी कहा कि 1971 की जनगणना पर आधारित मौजूदा सीट आवंटन दशकों से जमे रहने के कारण कई निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी में बड़ा असंतुलन पैदा हो चुका है। सूर्या के अनुसार, कुल सीटें स्थिर रखकर महिला आरक्षण लागू करना "एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य" के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत जाएगा।

850 सीटों वाले सदन और क्षेत्रीय राजनीति पर असर

सूर्या ने 850 सदस्यीय लोकसभा के प्रस्ताव का भी समर्थन किया, जिसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों से भरी जानी हैं। उन्होंने कहा कि सदन बड़ा होने से सार्थक बहस बाधित होने का तर्क टिकता नहीं है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बैठकें आयोजित की जा सकती हैं।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा उठाई गई degressive proportionality की दलील पर सूर्या ने कहा कि यह संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष पर दक्षिण भारत में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और द्रमुक की आपत्तियों को राजनीतिक प्रचार बताया।

लोकसभा में गुरुवार को संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026, और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए, जिन पर विभाजन के बाद 207 सांसदों ने समर्थन और 126 ने विरोध में मतदान किया। इन तीनों विधेयकों पर मतदान शुक्रवार शाम 4 बजे निर्धारित है, जिससे प्रतिनिधित्व संरचना, महिला आरक्षण और संघीय राजनीतिक संतुलन पर व्यापक असर पड़ सकता है।

हम पहले भी लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव पर लिख चुके हैं। उस लेख में विपक्ष, खासकर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, की यह आपत्ति प्रमुख थी कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ा रही है और इसे जनगणना व संघीय संतुलन से जुड़े मुद्दों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। साथ ही, मतविभाजन के जरिए विधेयकों के पेश होने के बाद संसद में इस विषय पर गहरे ध्रुवीकरण की तस्वीर भी सामने आई थी।

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