केरल में एनडीए चुनाव प्रचार तेज, मतदान से पहले भाजपा ने हमला बढ़ाया

केरल में एनडीए चुनाव प्रचार तेज, मतदान से पहले भाजपा ने हमला बढ़ाया
केरल में तेज चुनाव प्रचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी भाषण और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोडशो के साथ केरल विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत एनडीए अपना प्रचार तेज कर रहा है। लेख के अनुसार, 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है और 4 मई को मतगणना होगी, जबकि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त होता है। इस समय अभियान का फोकस विपक्षी गठबंधनों के आरोपों का जवाब देने और राष्ट्रीय मुद्दों को राज्य की चुनावी बहस से जोड़ने पर है।

हाइलाइट्स

  • अमित शाह ने बेपोर में रोडशो किया और प्रधानमंत्री मोदी ने रैली में एनडीए की जीत का भरोसा जताया, जबकि एलडीएफ और यूडीएफ पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया।
  • मोदी ने 16-18 अप्रैल को संसद सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संशोधन और महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण को एनडीए की उपलब्धि बताया।
  • एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा ने राष्ट्रीय और वैचारिक मुद्दों के साथ आक्रामक प्रचार से मुकाबले की दिशा बदली।

बेपोर से राष्ट्रीय मुद्दों तक प्रचार की रणनीति

रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बेपोर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार केपी प्रकाश बाबू के समर्थन में रोडशो किया। इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रैली में भरोसा जताया कि भाजपा नीत एनडीए केरल चुनाव जीतेगा। उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ पर एफसीआरए विधेयक और समान नागरिक संहिता को लेकर झूठ फैलाने का आरोप भी लगाया।

मोदी ने अपने भाषण में कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला कानून एनडीए सरकार के दौरान पारित हुआ। उन्होंने 16, 17 और 18 अप्रैल को होने वाले संसद सत्र का भी उल्लेख किया, जहां नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा होने की बात कही गई। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेताओं को बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है और उम्मीद जताई कि वे सरकार की बात सुनेंगे।

फिल्मों, कानूनों और विपक्ष पर सियासी हमला

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में केरल फाइल्स, कश्मीर फाइल्स और धुरंधर जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने इन्हें झूठा बताया। उनके अनुसार, एलडीएफ और यूडीएफ ने एफसीआरए, यूसीसी और पहले सीएए जैसे मुद्दों पर भी गलत जानकारी फैलाई है। उन्होंने गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां दशकों से यूसीसी लागू है, फिर भी इसके बारे में भ्रम पैदा किया जा रहा है।

यह रुख दिखाता है कि भाजपा राज्य चुनाव में स्थानीय उम्मीदवारों के साथ राष्ट्रीय वैचारिक मुद्दों को भी प्रमुखता दे रही है। चुनावी बहस केवल सीटों और स्थानीय गठबंधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून, सामाजिक नीति और राजनीतिक भरोसे के सवालों तक फैल रही है। इससे मतदान से पहले प्रचार का स्वर और अधिक टकरावपूर्ण होता दिख रहा है।

तीन गठबंधनों के बीच बहुकोणीय मुकाबला

केरल में मुकाबला मुख्य रूप से एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच है। माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ में केरल कांग्रेस (एम), राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शरदचंद्र पवार गुट, जैसे दल शामिल हैं। यूडीएफ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, केरल कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग शामिल हैं।

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में कुछ क्षेत्रीय दल भी हैं, जिनमें ट्वेंटी 20 पार्टी, भारत धर्म जन सेना और केरल कामराज कांग्रेस शामिल हैं। एक चरण में होने वाला मतदान राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेगा, जबकि नतीजे यह बताएंगे कि क्या भाजपा का आक्रामक प्रचार पारंपरिक दो मोर्चों वाली प्रतिस्पर्धा को बदल पाता है। फिलहाल सभी गठबंधन अंतिम दौर के प्रचार में अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं।

हमने पहले केरल विधानसभा चुनाव से पहले एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में विकास मॉडल, बुनियादी ढांचे और शासन रिकॉर्ड को प्रमुख मुद्दा बनने की रिपोर्ट की थी। उस कवरेज में एलडीएफ की जनकेंद्रित विकास दलील, एनडीए की फंडिंग और एफसीआरए/यूसीसी/सीएए जैसे मुद्दों पर विपक्ष पर हमले, और मतदान व मतगणना कार्यक्रम के साथ तेज होते प्रचार की तस्वीर सामने आई थी।

इस सामग्री में तृतीय-पक्ष की राय शामिल हो सकती है, इस वेबपेज पर कोई भी डेटा और जानकारी हमारे अस्वीकरण के अनुसार निवेश सलाह का गठन नहीं करती है। जबकि हम सख्त संपादकीय अखंडता का पालन करते हैं, इस पोस्ट में हमारे भागीदारों के उत्पादों के संदर्भ शामिल हो सकते हैं।