असम 126 सीटों पर मतदान, एनडीए और विपक्ष के लिए सत्ता का दांव
आधिकारिक दल घोषणाओं और निर्वाचन कार्यक्रम के आधार पर असम में 9 अप्रैल को सभी 126 विधानसभा सीटों पर एक चरण में मतदान हो रहा है, जबकि मतगणना 4 मई को तय है। मुकाबला भाजपा नीत एनडीए और बिखरे विपक्ष के बीच है, और 2023 के परिसीमन के बाद बदली सीमाएं, करीब 6.28 लाख नए मतदाता तथा रोजगार, बाढ़, पहचान और प्रवासन जैसे मुद्दे चुनावी गणित को प्रभावित कर रहे हैं। प्रचार 7 अप्रैल शाम 5 बजे थम चुका है, जिसके बाद धारा 126 के तहत रैलियों, प्रसारण आधारित प्रचार, एसएमएस अभियान और एग्जिट पोल पर रोक लागू है।
हाइलाइट्स
- असम की 126 सीटों पर मतदान में भाजपा 90, कांग्रेस 72 और एआईयूडीएफ 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, एनडीए के साथ एजीपी व बीपीएफ गठबंधन में शामिल हैं।
- बोडोलैंड क्षेत्र की 15 सीटें और निचले असम में अल्पसंख्यक वोटिंग पैटर्न सरकार गठन के समीकरण और राज्यव्यापी परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
- 2016 और 2021 में भाजपा ने बहुल जीत दर्ज की थी, 2021 में 60 सीटें हासिल कीं, मौजूदा चुनाव में एनडीए की बढ़त बरकरार रहने या विपक्षी पुनरुत्थान की परीक्षा है।
उम्मीदवार सूची, चरणबद्ध तैयारी और प्रमुख सीटें
राज्यभर में मतदान शहरी केंद्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक फैला है, और प्रशासनिक तैयारी का पैमाना कई निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ा दिखाई देता है। नगांव जिले की कालियाबोर सीट पर 1.88 लाख मतदाताओं के लिए 245 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जो इस चुनावी अभ्यास की व्यापकता को रेखांकित करते हैं। इस बार मुकाबला केवल दलों के बीच नहीं, बल्कि परिसीमन के बाद बदले सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों के बीच भी हो रहा है।
भाजपा ने मार्च में अपने उम्मीदवारों की बड़ी सूची जारी करते हुए कई मौजूदा विधायकों को बदला, कुछ दलबदलुओं को शामिल किया और कई महिला चेहरों को आगे बढ़ाया। कांग्रेस ने अपनी केंद्रीय चुनाव समिति के जरिये चुनिंदा सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और 11 सीटें सहयोगी राइजर दल के लिए छोड़ी हैं। उपलब्ध संकलित आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 90, कांग्रेस 72 और एआईयूडीएफ 23 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है, जबकि एनडीए में भाजपा, एजीपी और बीपीएफ शामिल हैं।
जालुकबारी, धुबरी बेल्ट, बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन, ऊपरी असम का चाय क्षेत्र और जोरहाट तथा मध्य असम इस चुनाव के अहम केंद्र बने हुए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जालुकबारी से अपनी पकड़ बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अल्पसंख्यक बहुल निचले असम में विपक्षी मतों का बिखराव निर्णायक बन सकता है। चाय बागान क्षेत्रों में श्रमिक मतदाताओं का रुझान भी एनडीए और विपक्ष, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गठबंधन गणित और क्षेत्रीय असर
एनडीए की ओर से भाजपा के साथ एजीपी और बीपीएफ चुनावी आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि विपक्ष कई दलों में बंटा हुआ दिखाई देता है। कांग्रेस, राइजर दल और अन्य सहयोगियों का तालमेल कुछ सीटों पर सीधी चुनौती देता है, लेकिन एआईयूडीएफ के साथ औपचारिक गठजोड़ नहीं होने से कई इलाकों में विपक्षी वोट विभाजित हो सकते हैं। इससे करीबी मुकाबलों में सीटों का अंतर छोटा रहते हुए भी परिणाम बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
बोडोलैंड क्षेत्र की 15 सीटें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहां की बाद की राजनीतिक स्थिति सरकार गठन के समीकरण बदल सकती है। इसी तरह, धुबरी और निचले असम की सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाता पैटर्न राज्यव्यापी परिणाम पर असर डाल सकता है। गुवाहाटी और आसपास की शहरी सीटों पर विकास, रोजगार और बुनियादी ढांचे का मुद्दा अधिक उभर रहा है, जबकि ग्रामीण हिस्सों में कल्याण योजनाएं, बाढ़ और आजीविका ज्यादा प्रमुख हैं।
पहली बार मतदान करने वाले और युवा उम्मीदवार इस चुनाव में नई ऊर्जा जोड़ रहे हैं। विभिन्न दल युवा चेहरों को उतारकर पारंपरिक वोट आधार से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कुछ सीटों पर स्थानीय मुद्दों की अहमियत और बढ़ जाती है। यही कारण है कि असम का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन या निरंतरता का सवाल नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सामाजिक संतुलन और नीति प्राथमिकताओं की भी परीक्षा बन रहा है।
पिछले नतीजे, मतदाता निर्देश और चुनावी संकेत
पिछले चुनावी रुझान बताते हैं कि भाजपा और उसके सहयोगियों ने 2016 और 2021 में मजबूत प्रदर्शन किया था, हालांकि 2021 में कांग्रेस ने अपनी सीट संख्या बढ़ाई थी। भाजपा 2021 में 60 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही, जबकि बहुमत के लिए 64 सीटों की जरूरत होती है। इस पृष्ठभूमि में मौजूदा चुनाव एनडीए की बढ़त कायम रहने या विपक्ष के आंशिक पुनरुत्थान की परीक्षा माना जा रहा है।
निर्वाचन तंत्र ने साफ किया है कि ऑनलाइन मतदान की सुविधा उपलब्ध नहीं है और मतदाताओं को बूथ पर जाकर ईवीएम के माध्यम से मतदान करना है। मतदाता पहचान सत्यापन, व्यक्तिगत उपस्थिति और अद्यतन मतदाता सूची पर जोर दिया गया है। प्रवासन पर बहस के बीच अद्यतन रोल और विशेष पुनरीक्षण की संवेदनशीलता भी मतदान प्रतिशत और स्थानीय राजनीतिक प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
अंतिम दौर में चुनावी विमर्श रोजगार, महंगाई, बाढ़, बुनियादी ढांचे और पहचान की राजनीति के बीच घूम रहा है। एनडीए सड़कों, शिक्षा, सौर परियोजनाओं और कल्याण योजनाओं में निरंतरता का संदेश दे रहा है, जबकि विपक्ष असमान विकास और बेरोजगारी का मुद्दा उठा रहा है। नतीजे आने तक बाजार, निवेशक और स्थानीय कारोबारी वर्ग राज्य की नीतिगत दिशा पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
हमने पहले असम विधानसभा चुनाव में अंडर-40 उम्मीदवारों और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को साधने की रणनीति पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में भाजपा की सूची में पीढ़ीगत बदलाव, एनडीए के सीट-बंटवारे और गुवाहाटी व अन्य सीटों पर युवा चेहरों के संभावित असर का उल्लेख था। यही पृष्ठभूमि मौजूदा चुनाव में उम्मीदवार सूची, प्रमुख सीटों और क्षेत्रीय समीकरणों की समझ को और स्पष्ट करती है।
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