असम, केरल, पुडुचेरी में विधानसभा मतदान शुरू, 296 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया केंद्रित
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, असम, केरल और पुडुचेरी में आज एकल चरण में मतदान शुरू हो रहा है, जहां कुल 296 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। आयोग का कहना है कि शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सुचारु मतदान के लिए व्यापक सुरक्षा और निगरानी प्रबंध किए गए हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक चलता है, जबकि मतगणना 4 मई को होनी है।
हाइलाइट्स
- असम, केरल और पुडुचेरी की 296 विधानसभा सीटों पर आज एक चरण में मतदान शुरू हुआ, चुनाव प्रक्रिया के लिए वेबकास्टिंग और व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए।
- असम, केरल और पुडुचेरी में कुल करोड़ों मतदाताओं की भागीदारी वाले इस चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे, जिससे क्षेत्रीय राजनीति और नीतियों पर असर पड़ेगा।
- मुख्य मुकाबला असम में भाजपा-एनडीए व कांग्रेस गठबंधन, केरल में एलडीएफ व यूडीएफ, और पुडुचेरी में एनडीए व कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के बीच है।
मतदान प्रबंधन और चुनावी ढांचा
इन तीनों क्षेत्रों में मतदान एक ही चरण में हो रहा है, जिसमें असम की 126, केरल की 140 और पुडुचेरी की 30 सीटें शामिल हैं। चुनावी प्रक्रिया के लिए वेबकास्टिंग, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती, संवेदनशील केंद्रों पर माइक्रो-ऑब्जर्वर और मतदाताओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। आयोग ने पानी, शौचालय, व्हीलचेयर, बेंच और फोन रखने की सुविधा जैसे प्रबंधों पर भी जोर दिया है।
असम में चुनाव प्रबंधन के लिए बड़ी संख्या में बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और VVPAT लगाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में मतदान कर्मी ड्यूटी पर हैं। राज्य में 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के एक हिस्से ने पहले ही घर से डाक मतपत्र के जरिये मतदान किया है। युवा और बुजुर्ग मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए SVEEP अभियान भी चलाया गया है।
आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के तहत मतदान दिवस पर कर्मचारियों, जिनमें दिहाड़ी श्रमिक भी शामिल हैं, के लिए सवेतन अवकाश का प्रावधान लागू किया है। निर्देशों का पालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान है। यह व्यवस्था मतदाता भागीदारी बढ़ाने और बिना वेतन कटौती के मतदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
तीनों क्षेत्रों में प्रमुख राजनीतिक मुकाबले
असम में भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में लगातार तीसरे कार्यकाल की कोशिश कर रहा है। इसके सामने गौरव गोगोई के नेतृत्व वाला कांग्रेस समर्थित छह दलों का गठबंधन है। चुनाव प्रचार के दौरान घुसपैठ, भ्रष्टाचार और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।
केरल में मुकाबला त्रिकोणीय स्वरूप लेता है, जहां एलडीएफ के पिनराई विजयन लगातार तीसरे कार्यकाल की कोशिश में हैं। कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार विरोधी मुद्दों और भ्रष्टाचार के आरोपों को उभार रही है, जबकि भाजपा राज्य में अपना वोट शेयर बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पुडुचेरी में मुख्यमंत्री एन रंगासामी के नेतृत्व वाला एनडीए, कांग्रेस-डीएमके गठबंधन की चुनौती का सामना कर रहा है, जबकि अभिनेता विजय की टीवीके को भी एक संभावित प्रभावकारी तत्व के रूप में देखा जा रहा है।
चुनाव प्रचार 7 अप्रैल को समाप्त हुआ था, जिसके दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई प्रमुख नेताओं ने रैलियां की थीं। इन अभियानों में विकास, शासन, कथित भ्रष्टाचार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उभरकर सामने आए। आज का मतदान इन राजनीतिक दावों की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
मतदाता भागीदारी और क्षेत्रीय असर
असम, केरल और पुडुचेरी में कुल मतदाताओं की संख्या बहुत बड़ी है, जिससे यह चुनाव राष्ट्रीय राजनीतिक संकेतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनता है। असम और केरल में करोड़ों मतदाता मतदान के लिए पात्र हैं, जबकि पुडुचेरी में भी लाखों मतदाता नई विधानसभा के गठन में भूमिका निभाते हैं। एकल चरण में मतदान होने से प्रशासनिक संसाधनों का केंद्रित उपयोग संभव होता है।
चुनाव परिणाम 4 मई को आने हैं, इसलिए आज का मतदान निवेश, नीति और प्रशासनिक स्थिरता को लेकर क्षेत्रीय अपेक्षाओं का आधार तय करता है। असम में सत्ता की निरंतरता या परिवर्तन का असर राज्य की नीतिगत दिशा पर पड़ेगा, जबकि केरल में परिणाम राज्य की प्रतिस्पर्धी बहुदलीय राजनीति का संकेत देंगे। पुडुचेरी में नतीजे छोटे केंद्रशासित प्रदेश की गठबंधन राजनीति और शासन समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
व्यापक सुरक्षा प्रबंध और रियल टाइम निगरानी का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत करना है। उच्च दांव वाले इस चुनावी दिन में मतदान प्रतिशत भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक रहेगा। तीनों क्षेत्रों में आज का मतदान स्थानीय सत्ता संतुलन के साथ व्यापक राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित कर सकता है।
हमने पहले केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को होने वाले एकल चरण के मतदान की समय-सारिणी और चुनाव आयोग की सुरक्षा व प्रशासनिक तैयारियों पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में तीनों क्षेत्रों के प्रमुख राजनीतिक मुकाबलों—केरल में त्रिकोणीय लड़ाई, असम में भाजपा बनाम कांग्रेस और पुडुचेरी में एनडीए बनाम कांग्रेस-डीएमके—के साथ 4 मई की मतगणना के व्यापक असर का भी उल्लेख था।
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