जेवर क्षेत्र हवाईअड्डा-केंद्रित विकास की क्षमता पर निवेशकों की नजर
मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के उद्घाटन के बाद, जेवर के आसपास की जमीन और औद्योगिक परिसंपत्तियों के विकास को लेकर फोकस बढ़ गया है। लेख के अनुसार, यह परियोजना तभी सफल मानी जाएगी जब हवाईअड्डे के साथ जुड़ा शहरी, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक इकोसिस्टम समयबद्ध तरीके से विकसित हो। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रनवे और टर्मिनल नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी, भूमि उपयोग और गैर-विमानन राजस्व इसके कारोबारी मॉडल को टिकाऊ बनाएंगे।
हाइलाइट्स
- जेवर हवाईअड्डे के आसपास की जमीन पर पिछले पांच वर्षों में अपार्टमेंट कीमतें लगभग तीन गुना और प्लॉट मूल्य 1.5 गुना बढ़ चुकी हैं।
- एयर इंडिया सैट्स एयरपोर्ट सर्विसेज और एंबर एंटरप्राइजेज ने जेवर में क्रमशः 4,458 करोड़ रुपये और 6,785 करोड़ रुपये की परियोजनाएं घोषित कीं।
- दिल्ली हवाईअड्डे पर 2030 तक संतृप्ति का अनुमान विशेषज्ञ बताते हैं, जिससे जेवर पूरक विमानन-आधारित आर्थिक केंद्र के रूप में उभर सकता है।
एरोट्रोपोलिस मॉडल के लिए जमीन, निवेश और समयरेखा
जेवर को भारत के संभावित एरोट्रोपोलिस मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यहां हवाईअड्डे के आसपास बड़े और अपेक्षाकृत सतत भूमि पार्सल उपलब्ध हैं। इसी वजह से उद्योग और रियल एस्टेट कंपनियां इसे दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा अवसर मान रही हैं। लेख में दुबई और दक्षिण कोरिया के उदाहरणों के जरिए बताया गया है कि ऐसे मॉडल दशकों में परिपक्व होते हैं और इनके लिए राज्य समर्थित, अनुशासित और समन्वित योजना जरूरी होती है।
एविएशन विशेषज्ञ धैर्यशील वांडेकर के मुताबिक, भारत में जेवर जैसी परियोजना की सफलता निरंतर नीतिगत समर्थन, संस्थागत समन्वय और सुव्यवस्थित भूमि उपयोग पर निर्भर करती है। उनका कहना है कि यदि बुनियादी ढांचा चरणबद्ध ढंग से पूरा होता है और निजी निवेश लंबे समय तक बना रहता है, तो यह क्षेत्र भारत के प्रमुख विमानन-आधारित आर्थिक क्षेत्रों में बदल सकता है। हालांकि, वह यह भी चेतावनी देते हैं कि समानांतर विकास में देरी होने पर हवाईअड्डे की क्षमता का कम उपयोग होने का जोखिम रहेगा।
संपत्ति बाजार में इसका असर पहले ही दिख रहा है। स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों में जेवर में अपार्टमेंट कीमतें लगभग तीन गुना हो चुकी हैं, जबकि प्लॉट के मूल्य करीब 1.5 गुना बढ़े हैं, और कुछ सूक्ष्म बाजारों में वृद्धि 5 गुना तक पहुंची है। यह रुझान बताता है कि परियोजना ने बुनियादी ढांचा-आधारित पूंजी प्रशंसा की उम्मीदों को मजबूत किया है।
कनेक्टिविटी, कार्गो और औद्योगिक क्लस्टर की कारोबारी अहमियत
विशेषज्ञों के अनुसार, जेवर की वाणिज्यिक व्यवहार्यता केवल यात्री यातायात पर नहीं, बल्कि मल्टी-मोडल कार्गो और गैर-विमानन आय पर भी निर्भर करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने हवाईअड्डे के आसपास डेटा सेंटर, मेडिकल डिवाइस पार्क, परिधान पार्क, खिलौना विनिर्माण पार्क और एचसीएल-फॉक्सकॉन से जुड़ी सेमीकंडक्टर इकाई जैसे औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की पहल की है। इससे हवाईअड्डे को लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और सप्लाई चेन नेटवर्क के केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश दिखती है।
कई कंपनियां पहले ही निवेश योजनाएं घोषित कर चुकी हैं। एयर इंडिया सैट्स एयरपोर्ट सर्विसेज जेवर में 4,458 करोड़ रुपये की दो परियोजनाएं स्थापित करने जा रही है। जनवरी में एंबर एंटरप्राइजेज ने भी हवाईअड्डे के पास 6,785 करोड़ रुपये के निवेश से नई इकाइयां लगाने की घोषणा की थी, जबकि ताजसैट्स ने हवाईअड्डा परिसर में 45,000 वर्ग फुट का किचन सुविधा केंद्र स्थापित किया है।
फिर भी, कनेक्टिविटी एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। लेख में कहा गया है कि यमुना एक्सप्रेसवे से संपर्क होने के बावजूद हवाईअड्डे के आसपास समर्पित बस स्टॉप नहीं हैं, जबकि हरियाणा, दिल्ली और अन्य इलाकों को जोड़ने वाली 40 करोड़ रुपये की सड़क जनवरी में घोषित की गई थी। मेट्रो और रैपिड रेल परियोजनाओं की प्रगति भी इस क्षेत्र की वास्तविक उपयोगिता और निवेश आकर्षण तय करेगी।
दिल्ली-एनसीआर विमानन बाजार पर संभावित असर
जेवर का उभार दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और उससे जुड़े एरोसिटी मॉडल के संदर्भ में देखा जा रहा है। दिल्ली एरोसिटी पहले से एक परिपक्व व्यावसायिक केंद्र है, जहां होटल, कार्यालय, खानपान और खुदरा ढांचा विकसित हो चुका है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक दिल्ली हवाईअड्डे पर संतृप्ति का दबाव बढ़ सकता है, जिससे जेवर को पूरक क्षमता के रूप में जगह मिल सकती है।
हीरो रियल्टी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रोहित किशोर का कहना है कि जेवर का लाभ इसके बड़े और सतत भूमि पार्सलों में है, जो औद्योगिक और आवासीय विकास को एकीकृत पैमाने पर संभव बनाते हैं। वहीं, वोमेकी ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन गौरव के सिंह के अनुसार, दिल्ली की मौजूदगी खतरा नहीं बल्कि दोहरे हवाईअड्डा इकोसिस्टम का अवसर हो सकती है, जिसमें एक केंद्र मौजूदा मांग और दूसरा भविष्य की वृद्धि को संभाले। इस दृष्टि से जेवर केवल एक नया हवाईअड्डा नहीं, बल्कि एनसीआर में अगली विमानन-आधारित आर्थिक धुरी के रूप में उभरने की परीक्षा से गुजर रहा है।
हमने पहले विश्व बैंक की साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट रिपोर्ट के आधार पर भारत की वित्त वर्ष 2027 की जीडीपी वृद्धि दर 6.6% रहने के अनुमान और ऊर्जा कीमतों व वैश्विक अनिश्चितताओं से जुड़े जोखिमों पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में व्यापार समझौतों से बाजार पहुंच बढ़ने, निर्यात-निवेश की गति पर असर और ऊंचे इक्विटी वैल्यूएशन के चलते संभावित सुधार की आशंका जैसे बिंदुओं पर भी चर्चा थी।
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