पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने कथित ₹1,000 करोड़ भाजपा सौदे का वीडियो जारी किया
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी एक वीडियो ने राजनीतिक विवाद को तेज कर दिया है। टीएमसी नेताओं के अनुसार, 19 मिनट की इस क्लिप में एजेयूपी नेता हुमायूं कबीर जैसा दिखने वाला व्यक्ति चुनाव बाद समर्थन के बदले भाजपा से ₹1,000 करोड़ की मांग, सीट गणित और मुस्लिम मतदाताओं को प्रभावित करने की रणनीति पर बात करता सुनाई देता है। वीडियो की प्रामाणिकता स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुई है, जबकि कबीर इसे एआई-जनित बताकर भाजपा से किसी भी संबंध से इनकार करते हैं।
हाइलाइट्स
- टीएमसी ने 'द रियलिटी ऑफ एचके' वीडियो जारी कर भाजपा पर ₹1,000 करोड़ सौदे और विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी की संलिप्तता का आरोप लगाया।
- वीडियो में भाजपा को 100-120 सीटें मिलने, 70-80 सीटें दिलाने पर उपमुख्यमंत्री पद की डील और मुस्लिम वोटरों के लिए ₹300 करोड़ अग्रिम देने की बात सामने आई।
- हुमायूं कबीर ने वीडियो को एआई जनित बताते हुए भाजपा से संबंध नकारे, फिर भी मामला बंगाल के मुस्लिम वोट बैंक और चुनावी ध्रुवीकरण को प्रभावित कर सकता है।
वीडियो के आरोप और चुनावी गणित
टीएमसी के मुताबिक, “द रियलिटी ऑफ एचके” शीर्षक वाली क्लिप में कथित तौर पर यह दावा किया जाता है कि भाजपा 294 सदस्यीय विधानसभा में 100 से 120 सीटें ला सकती है, लेकिन बहुमत से पीछे रह सकती है। वीडियो में व्यक्ति कथित रूप से विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ बातचीत और 70 से 80 सीटें दिलाने पर उपमुख्यमंत्री पद के आश्वासन का भी जिक्र करता है। क्लिप में मुस्लिम वोटरों को अपनी ओर लाने के लिए धन की जरूरत, शुरुआती ₹300 करोड़ अग्रिम और बिहार जैसी प्रथाओं का हवाला भी सुनाई देता है।
टीएमसी की मांग और कबीर का जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीएमसी नेताओं फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि भाजपा धार्मिक आधार पर राजनीति को आगे बढ़ाने और मुस्लिम वोटों में विभाजन की कोशिश कर रही है। घोष ने कहा कि वीडियो में ₹1,000 करोड़, प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अनाम अधिकारी और कथित चुनावी हेरफेर का जिक्र सामने आता है, इसलिए संबंधित नामों की पहचान और जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धन के प्रवाह की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को हुमायूं कबीर से पूछताछ करनी चाहिए।क्षेत्रीय राजनीतिक असर और पृष्ठभूमि
हुमायूं कबीर, जो 2025 में टीएमसी से निलंबित होने के बाद अलग राजनीतिक रास्ते पर हैं, वीडियो को एआई-जनित बताते हैं और भाजपा से जुड़ाव से इनकार करते हैं। उनकी पार्टी इस समय असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन में है और 100 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में यह विवाद बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक, विपक्षी ध्रुवीकरण और चुनावी नैरेटिव पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब आरोप सीधे धन, पद और चुनाव बाद समर्थन की संभावित सौदेबाजी से जुड़े हों।हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के हल्दिया रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस चुनावी संदेश पर चर्चा की गई थी, जिसमें उन्होंने राज्य में सत्ता परिवर्तन की “लहर” और निवेश-रोजगार के मुद्दे को केंद्र में रखा था। उस लेख में तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निवेश माहौल बिगाड़ने, युवाओं के अवसर सीमित करने और “डबल इंजन” सरकार के जरिए विकास का भरोसा दिलाने जैसी दलीलों का भी उल्लेख किया गया था।
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