जेवर हवाईअड्डा एनसीआर के एरोट्रोपोलिस मॉडल को गति दे सकता है

जेवर हवाईअड्डा एनसीआर के एरोट्रोपोलिस मॉडल को गति दे सकता है
जेवर से एरोट्रोपोलिस बदलाव

फोर्ब्स इंडिया की इस विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में पहले चरण के उद्घाटन के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास की जमीन, कनेक्टिविटी और औद्योगिक निवेश अब यह तय कर रहे हैं कि जेवर वास्तव में भारत का अगला एरोट्रोपोलिस बन पाता है या नहीं। कहानी का केंद्र केवल हवाईअड्डे का परिचालन नहीं, बल्कि उसके साथ विकसित होने वाला लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट, विनिर्माण और शहरी ढांचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक नीति समर्थन, समन्वित भूमि उपयोग और समयबद्ध बुनियादी ढांचा इस परियोजना की व्यावसायिक सफलता के लिए निर्णायक रहेंगे।

हाइलाइट्स

  • जेवर हवाईअड्डे के आसपास पिछले पांच वर्षों में अपार्टमेंट कीमतें लगभग तीन गुना और प्लॉट कीमतें 1.5 गुना बढ़ीं, जिससे निवेशकों की रुचि बढ़ी।
  • एयर इंडिया सैट्स एयरपोर्ट सर्विसेज 4,458 करोड़ रुपये और एम्बर एंटरप्राइजेज 6,785 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के साथ औद्योगिक निवेश को गति दे रहे हैं।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, जेवर का विकास 2030 तक दिल्ली हवाईअड्डे के संतृप्ति दबाव को कम कर एनसीआर में बहु-हवाईअड्डा ढांचे को मजबूती देगा।

हवाईअड्डा आधारित शहरीकरण की रूपरेखा

जेवर को ऐसे हवाईअड्डा-केंद्रित आर्थिक क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है, जहां कार्यालय परिसरों, कन्वेंशन होटलों, कार्गो सुविधाओं और विनिर्माण इकाइयों का समूह विकसित हो सकता है। रिपोर्ट में दुबई और दक्षिण कोरिया के उदाहरण दिए गए हैं, जहां एरोट्रोपोलिस मॉडल को राज्य समर्थन, लंबी योजना अवधि और समय से पहले बनाए गए बुनियादी ढांचे का लाभ मिला। इसी संदर्भ में उद्योग जगत यह देख रहा है कि क्या जेवर भारत के लिए वैसा ही ट्रांजिट और औद्योगिक केंद्र बन सकता है।

एविएशन विशेषज्ञ धैर्यशील वांडेकर का कहना है कि दुनिया में ऐसे हवाईअड्डा-आधारित शहरी क्षेत्र परिपक्व होने में दशकों लेते हैं। उनके अनुसार, भारत में बिखरे और कम घनत्व वाले विकास से बचने के लिए संस्थागत समन्वय, नीति निरंतरता और अनुशासित भूमि उपयोग जरूरी है। उनका यह भी कहना है कि अगर बुनियादी ढांचे की आपूर्ति सही क्रम में होती है और निजी निवेश लंबे समय तक बना रहता है, तो जेवर भारत के सबसे महत्वपूर्ण एविएशन-लिंक्ड आर्थिक क्षेत्रों में बदल सकता है।

फिलहाल कनेक्टिविटी एक अहम चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ाव होने के बावजूद हवाईअड्डे के आसपास समर्पित बस स्टॉप की कमी की चर्चा है, जबकि जनवरी में हरियाणा, दिल्ली और अन्य इलाकों को जोड़ने वाली 40 करोड़ रुपये की सड़क की घोषणा की गई थी। मेट्रो और रैपिड रेल परियोजनाओं की रफ्तार भी जेवर के वाणिज्यिक आकर्षण और यात्री प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भूमि, निवेश और औद्योगिक गलियारों पर दांव

जेवर की सबसे बड़ी कारोबारी बढ़त उसके आसपास उपलब्ध बड़े और अपेक्षाकृत सतत भूमि पार्सल माने जा रहे हैं। 2021 में शिलान्यास के बाद से इस क्षेत्र में जमीन और संपत्ति के दाम तेज़ी से बढ़े हैं, और स्क्वायर यार्ड्स की रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में अपार्टमेंट कीमतें लगभग तीन गुना तक पहुंची हैं, जबकि प्लॉट मूल्यों में करीब 1.5 गुना वृद्धि हुई है। कुछ माइक्रो-मार्केट में यह बढ़ोतरी पांच गुना तक बताई गई है, जिससे डेवलपर और निवेशक इसे दीर्घकालिक अवसंरचना अवसर के रूप में देख रहे हैं।

हीरो रियल्टी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रोहित किशोर का कहना है कि भारत में दुबई और कोरिया जैसे एयरपोर्ट-नेतृत्व वाले इकोसिस्टम के लिए जरूरी बुनियादी शर्तें मौजूद हैं, और अब प्राथमिकता सक्षम माहौल को मजबूत करने की है। वॉमेकी ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन गौरव के सिंह का मानना है कि भूमि विखंडन, नियामकीय देरी और असमन्वित अवसंरचना योजना बड़े पैमाने के विकास को धीमा कर सकती है। उनके अनुसार, भारत का मॉडल दुबई या दक्षिण कोरिया की तुलना में अधिक समय ले सकता है क्योंकि यहां केंद्रीकृत क्रियान्वयन सीमित है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने हवाईअड्डे के साथ कई औद्योगिक गलियारे और परियोजनाएं जोड़ी हैं, जिनमें डेटा सेंटर, एचसीएल-फॉक्सकॉन से जुड़ी सेमीकंडक्टर इकाई, मेडिकल डिवाइस पार्क, अपैरल पार्क और खिलौना विनिर्माण पार्क शामिल हैं। एयर इंडिया सैट्स एयरपोर्ट सर्विसेज 4,458 करोड़ रुपये की दो परियोजनाएं स्थापित करने जा रही है, जबकि एम्बर एंटरप्राइजेज ने जनवरी में 6,785 करोड़ रुपये के निवेश के साथ नई इकाइयां लगाने की घोषणा की थी। ताजसैट्स ने भी हवाईअड्डा परिसर में 45,000 वर्ग फुट का किचन सुविधा केंद्र स्थापित किया है, जिससे गैर-एरोनॉटिकल राजस्व और सहायक सेवाओं की संभावना बढ़ती है।

दिल्ली एनसीआर और उत्तर भारत पर संभावित असर

जेवर की प्रगति की तुलना स्वाभाविक रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और उसके आसपास विकसित एरोसिटी से की जा रही है। दिल्ली एरोसिटी ने समय के साथ होटल, खुदरा, खानपान और कॉर्पोरेट गतिविधियों का एक मजबूत शहरी क्लस्टर बनाया है, और गुरुग्राम जैसे वाणिज्यिक केंद्रों से उसकी सीधी कनेक्टिविटी उसे बढ़त देती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि 2030 तक दिल्ली हवाईअड्डे पर संतृप्ति का दबाव बढ़ सकता है, जिससे जेवर को पूरक क्षमता केंद्र के रूप में अवसर मिलता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में दिल्ली हवाईअड्डा दुनिया के पांच सबसे व्यस्त हवाईअड्डों में शामिल रहा, और उत्तर भारत के ट्रैफिक पर उसका दबदबा बना हुआ है। ऐसे में जेवर का विकास क्षेत्रीय यातायात का बोझ बांटने, कार्गो गतिविधि बढ़ाने और एनसीआर में बहु-हवाईअड्डा ढांचे को मजबूत करने में मदद कर सकता है। रोहित किशोर के अनुसार, बड़े और जुड़े हुए भूमि पार्सल औद्योगिक तथा आवासीय विकास को एकीकृत पैमाने पर संभव बनाते हैं, जिससे आत्मनिर्भर शहरी इकोसिस्टम की नींव पड़ सकती है।

गौरव के सिंह का कहना है कि दिल्ली एरोसिटी की मौजूदगी जेवर के लिए खतरा नहीं, बल्कि एक पूरक दोहरे-हवाईअड्डा इकोसिस्टम का अवसर है, जिसमें एक केंद्र मौजूदा मांग संभाले और दूसरा भविष्य की वृद्धि को समेटे। इसके साथ ही रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि भारत में एरोट्रोपोलिस मॉडल अभी सीमित सफलताओं तक सिमटा है, जबकि भूमि अधिग्रहण, स्वीकृतियां और स्थानीय विरोध जैसी बाधाएं बनी हुई हैं। इसलिए जेवर की सफलता अंततः इस बात पर निर्भर करेगी कि हवाईअड्डे के बाहर का आर्थिक, परिवहन और नियामकीय ढांचा कितनी तेजी और समन्वय से आकार लेता है।

हमने पहले जेवर को भारत के संभावित एरोट्रोपोलिस मॉडल के रूप में उभरते हुए, हवाईअड्डे के साथ जुड़े शहरी, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक इकोसिस्टम की जरूरत पर रिपोर्ट किया था। उस रिपोर्ट में कनेक्टिविटी, अनुशासित भूमि उपयोग और गैर-विमानन राजस्व को टिकाऊ कारोबारी मॉडल के लिए निर्णायक बताते हुए, जमीन कीमतों में तेजी और एयर इंडिया सैट्स तथा एंबर एंटरप्राइजेज जैसे निवेश घोषणाओं का भी उल्लेख था।

इस सामग्री में तृतीय-पक्ष की राय शामिल हो सकती है, इस वेबपेज पर कोई भी डेटा और जानकारी हमारे अस्वीकरण के अनुसार निवेश सलाह का गठन नहीं करती है। जबकि हम सख्त संपादकीय अखंडता का पालन करते हैं, इस पोस्ट में हमारे भागीदारों के उत्पादों के संदर्भ शामिल हो सकते हैं।