पश्चिम बंगाल चुनाव विवाद में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक की भूमिका पर सवाल तेज
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले चुनावी माहौल तब और तनावपूर्ण हो जाता है, जब चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा का एक वीडियो राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ जाता है। दक्षिण 24 परगना में उनकी कार्रवाई और कड़ी चेतावनी पर तृणमूल कांग्रेस निष्पक्षता, मतदाता दबाव और पर्यवेक्षक की सीमाओं को लेकर सवाल उठा रही है।
हाइलाइट्स
- 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया, खासकर फाल्टा क्षेत्र में कथित मतदान गड़बड़ी के बाद।
- तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पर्यवेक्षक और केंद्रीय बल पार्टी कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं, साथ ही पर्यवेक्षक के वीडियो को डराने वाला बताया।
- वरिष्ठ तृणमूल नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, जिससे राज्य में पहले से गरम चुनावी माहौल और ज्यादा तीखा हो गया।
दक्षिण 24 परगना में पर्यवेक्षक की तैनाती और विवाद
Financial Express के अनुसार, उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया है, जहां वह पिछले दो दिनों में फाल्टा विधानसभा क्षेत्र का दौरा करते हैं। यह इलाका डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी करते हैं।
वायरल वीडियो में शर्मा कथित तौर पर मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते सुनाई देते हैं। अधिकारियों का कहना है कि उनका दौरा इलाके में मतदाता धमकाने की शिकायतें मिलने के बाद होता है, और वह स्वतंत्र तथा निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए तैनात कई पर्यवेक्षकों में शामिल हैं।
तृणमूल कांग्रेस ने इस रुख को डराने वाला और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। स्थानीय उम्मीदवार जहांगीर खान के घर और दफ्तर के बाहर पार्टी समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि पर्यवेक्षक तथा केंद्रीय बल पार्टी कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और चुनावी माहौल पर असर
जहांगीर खान ने मंगलवार को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह मतदाताओं को धमकाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने लोकप्रिय फिल्मों के पात्रों का हवाला देते हुए कहा कि फाल्टा में बाहरी दबाव या कथित BJP-नियुक्त अधिकारियों की धमकी नहीं चलने दी जाएगी।राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पर्यवेक्षक का आचरण निष्पक्षता और चुनावी दिशानिर्देशों के पालन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
वीडियो में शर्मा कथित रूप से यह भी कहते सुनाई देते हैं कि अगर लोगों को परेशान करने या गड़बड़ी फैलाने की रिपोर्ट मिलती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्थानीय उम्मीदवार के समर्थकों पर भी आरोपों का जिक्र किया, जिससे राज्य में पहले से गरम चुनावी माहौल और अधिक तीखा हो जाता है, जबकि सत्तारूढ़ दल और विपक्षी खेमे अधिकारियों के आचरण तथा चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत बड़े पैमाने पर मतदाता सूची विलोपनों और उससे जुड़े राजनीतिक विवाद पर चर्चा की गई थी। उसमें बताया गया था कि विलोपन वाले क्षेत्रों में रिकॉर्ड मतदान के बावजूद लाखों लोगों की मतदान पात्रता को लेकर अनिश्चितता बनी रही और इस मुद्दे पर कानूनी व राजनीतिक खींचतान तेज हुई।
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