भारत का रक्षा रुख सख्त, राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को स्वैच्छिक विराम बताया
नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा पर बढ़ती बहस के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बताया और कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर अपनी शर्तों पर रोका। उन्होंने यह भी कहा कि भारत लंबी लड़ाई के लिए तैयार था, जबकि इस अभियान के बाद स्वदेशी रक्षा क्षमता और निर्यात में तेज बढ़ोतरी दिख रही है।
हाइलाइट्स
- राजनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले के जवाब में स्वेच्छा से रोका गया, न कि क्षमता की कमी से।
- 72 घंटे के अभियान में भारतीय बलों ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी लॉन्च पैड और आतंकी ढांचों को नष्ट किया।
- भारत का रक्षा निर्यात 2025-26 में 62.66 प्रतिशत बढ़कर लगभग 39,000 करोड़ रुपये पहुंचा, स्वदेशी हथियार प्रणालियों में वैश्विक रुचि बढ़ी।
सुरक्षा रणनीति और ऑपरेशन सिंदूर का पक्ष
Financial Express Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, ANI ने राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2.0 में राजनाथ सिंह के संबोधन के हवाले से बताया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर किसी क्षमता की कमी के कारण नहीं, बल्कि स्वेच्छा से रोका। सिंह के अनुसार 7 मई 2025 को शुरू किया गया यह अभियान पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में था, जिसमें जम्मू-कश्मीर में 26 नागरिक मारे गए थे।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ती तो भारत लंबी अवधि के संघर्ष के लिए भी पूरी तरह तैयार था। उनके मुताबिक भारतीय बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में नौ बड़े आतंकी प्रक्षेपण ठिकानों को निशाना बनाया और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद तथा हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े ढांचों को नष्ट किया।
सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोधक क्षमता का ठोस उदाहरण बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शांति बनाए रखने के लिए भय का तत्व भी जरूरी होता है। उन्होंने स्वदेशी हथियारों, भंडारण क्षमता और सशस्त्र बलों की विस्तारित तैयारी को इस 72 घंटे के अभियान की अहम ताकत बताया।
पाकिस्तान पर आरोप और रक्षा क्षेत्र पर असर
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के परिचालन, वैचारिक और राजनीतिक, तीनों आयामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी जड़ें पाकिस्तान में हैं और उन्हें पूरी तरह समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान की स्वतंत्रता के बाद की दिशा की तुलना करते हुए कहा कि भारत सूचना प्रौद्योगिकी में आगे बढ़ा है, जबकि पाकिस्तान की पहचान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़ गई है।पाठ में कहा गया है कि अभियान के बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमले और गोलाबारी बढ़ी, जिससे चार दिन का संघर्ष हुआ, और भारत ने लाहौर तथा गुजरांवाला के पास रडार ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद 10 मई को युद्धविराम हुआ, जब पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के समकक्ष से संपर्क किया।
सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शून्य सहनशीलता नीति के तहत भारत अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 62.66 प्रतिशत बढ़कर लगभग 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि स्वदेशी हथियार प्रणालियों में वैश्विक रुचि भी बढ़ रही है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में भारत के जर्मनी की TKMS से छह P-75I पनडुब्बियां खरीदने के संभावित 8 अरब डॉलर के सौदे पर चर्चा की गई थी। उस लेख में बताया गया था कि मुंबई में संयोजन और तकनीकी हस्तांतरण की संभावना के साथ यह कदम घरेलू विनिर्माण पारितंत्र, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा आधुनिकीकरण को गति दे सकता है।
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