भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के फलता में पुनर्मतदान का दायरा सभी 285 बूथों तक बढ़ाया

भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के फलता में पुनर्मतदान का दायरा सभी 285 बूथों तक बढ़ाया
फलता में सभी बूथों पर पुनर्मतदान

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट में कथित चुनावी गड़बड़ियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग 21 मई को सभी 285 मतदान केंद्रों पर फिर से मतदान करा रहा है। यह कदम 29 अप्रैल 2026 को हुए दूसरे चरण के मतदान के बाद उठाया गया है, जबकि मतगणना 24 मई को निर्धारित है और विवाद अब व्यापक चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है।

हाइलाइट्स

  • भारत निर्वाचन आयोग ने 144-फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान का आदेश दिया।
  • आयोग ने विशेष पर्यवेक्षक की 30 बूथों पर सीमित पुनर्मतदान की सिफारिश को ठुकराते हुए व्यापक पुनर्मतदान का निर्णय लिया, भाजपा की पूर्ण पुनर्निर्वाचन की मांग के बाद।
  • डायमंड हार्बर में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के सहयोगियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश और पुनर्मतदान से क्षेत्र में प्रशासनिक व राजनीतिक दबाव बढ़ा।

आयोग का आदेश और मतदान कार्यक्रम

जैसा कि Financial Express के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक बयान के अनुसार, 144-फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों, जिनमें सहायक बूथ भी शामिल हैं, पर 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान होगा। आयोग ने कहा कि 29 अप्रैल 2026 के मतदान के दौरान बड़ी संख्या में केंद्रों पर गंभीर चुनावी अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की घटनाओं पर विचार करने के बाद यह निर्देश जारी किया गया है।

यह फैसला आयोग की कार्रवाई को और व्यापक बनाता है, क्योंकि शनिवार को ही मोगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर के 15 बूथों पर पुनर्मतदान कराया गया था। फलता, जहां दूसरे चरण में मतदान हुआ था, अब कथित व्यापक चुनावी कदाचार के आरोपों के कारण प्रमुख विवाद केंद्र बन गया है।

आयोग द्वारा नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने कथित तौर पर 30 बूथों पर फिर से मतदान की सिफारिश की थी, लेकिन आयोग ने उससे कहीं बड़ा हस्तक्षेप चुना। भाजपा ने भी फलता में पूर्ण पुनर्निर्वाचन की मांग की थी और आरोप लगाया था कि कई बूथों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में उसके उम्मीदवार के बटन को सफेद टेप से ढका गया था।

कानूनी कार्रवाई और क्षेत्रीय राजनीतिक असर

आयोग ने डायमंड हार्बर के जिला पुलिस अधिकारियों को तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान से कथित रूप से जुड़े सहायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने का निर्देश भी दिया है। यह कार्रवाई उन आरोपों के बाद हुई, जिनमें स्थानीय निवासियों ने भाजपा का समर्थन करने पर धमकी और डराने-धमकाने की शिकायत की थी।

फलता में सभी बूथों पर पुनर्मतदान का फैसला पश्चिम बंगाल के चुनावी प्रबंधन पर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव को बढ़ाता है। इतने बड़े पैमाने पर पुनर्मतदान से निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता, स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दलों की निगरानी पर असर पड़ता है, जबकि 24 मई की मतगणना से पहले चुनावी विवाद और तीखे होने की संभावना बनी हुई है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम की सुरक्षा और मतगणना प्रक्रिया पर बढ़ती राजनीतिक निगरानी का जिक्र किया गया था। उसमें भवानीपुर में धारा 163 लागू होने, अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और तृणमूल कांग्रेस व भाजपा द्वारा ईवीएम/चुनावी सामग्री में कथित छेड़छाड़ को लेकर उठाए गए आरोपों से बने तनावपूर्ण माहौल को रेखांकित किया गया था।

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