भारत पर U.S. शुल्क जोखिम बढ़ा, ट्रंप कानून रूसी तेल खरीदारों पर 100% तक टैरिफ की अनुमति देता है

भारत पर U.S. शुल्क जोखिम बढ़ा, ट्रंप कानून रूसी तेल खरीदारों पर 100% तक टैरिफ की अनुमति देता है
भारत पर टैरिफ खतरा

रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर U.S. आयात शुल्क बढ़ाने की नई व्यवस्था भारत के निर्यातकों के लिए बड़ा नीतिगत जोखिम पैदा करती है। यह कानून ट्रंप प्रशासन को भारत समेत शीर्ष खरीदार देशों से आने वाले सभी सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देता है, जबकि भारत U.S. को अपने सबसे बड़े निर्यात बाजार के रूप में देखता है।

हाइलाइट्स

  • Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 राष्ट्रपति ट्रंप को भारत और चीन समेत रूसी तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों के U.S. आयात पर 100% तक शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
  • भारत रूस से अगस्त 2026 में 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात करता है, जो देश की कुल खरीद का लगभग 45 प्रतिशत है।
  • 2025 में U.S. भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहता है, जहां $92.3 अरब के निर्यात में विद्युत मशीनरी एवं उपकरण $25.8 अरब की हिस्सेदारी रखते हैं।

कानून का दायरा और लागू होने की रूपरेखा

Forbes India के अनुसार, U.S. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर किए, जिसे प्रतिनिधि सभा 16 सितंबर को पारित करती है। यह कानून ट्रंप को उन देशों पर, जिनमें भारत और चीन शामिल हैं, U.S. में आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक ad valorem शुल्क लगाने का अधिकार देता है, यदि वे कानून पर हस्ताक्षर होने के 30 दिन बाद भी रूसी मूल का कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और मात्रा के हिसाब से शीर्ष पांच खरीदारों में बने रहते हैं।

कानून रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के साथ उन तथाकथित shadow fleet जहाजों को भी निशाना बनाता है जिनका उपयोग रूसी तेल ढोने और प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही Iran Sanctions Act of 1996 की अवधि 2031 तक बढ़ाई जाती है।

U.S. Trade Representative ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह कानून दिखाता है कि टैरिफ आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए प्रभावी औजार हैं। कानून के तहत लगाया जाने वाला शुल्क अन्य लागू शुल्क, फीस, कर या प्रभार के अतिरिक्त होगा, जबकि U.S. हर 180 दिन में संबंधित देशों की स्थिति की फिर से समीक्षा करेगा और राष्ट्रपति को निर्धारित शर्तों के तहत छूट देने का अधिकार भी रहेगा।

भारत के निर्यात और ऊर्जा खरीद पर संभावित असर

भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, जबकि चीन पहले स्थान पर है। Helsinki स्थित Centre for Research on Energy and Clean Air के अनुसार दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस के कच्चे तेल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत और भारत की 37 प्रतिशत रहती है।

2026 में भी भारत का रूसी तेल आयात ऊंचा बना रहता है। Kpler के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में भारत का आयात 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, जो देश की कुल कच्चे तेल खरीद का लगभग 45 प्रतिशत बनाता है।

शुल्क जोखिम भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2025 में U.S. भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहता है, जहां लगभग 92.3 अरब डॉलर के सामान की बिक्री होती है। इनमें विद्युत मशीनरी और उपकरण लगभग 25.8 अरब डॉलर के साथ सबसे बड़ी श्रेणी हैं, जबकि दवाएं, मशीनरी, रसायन, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग सामान भी प्रमुख निर्यात श्रेणियों में शामिल हैं।

प्रतिनिधि सभा में मतदान के बाद विदेश मंत्रालय कहता है कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और बदलती बाजार स्थितियों के आधार पर विविध स्रोतों से खरीद जारी रखेगा। मंत्रालय यह भी कहता है कि इस मुद्दे पर हाल के महीनों में U.S. पक्ष के साथ उच्च स्तर पर चर्चा होती है, भारत द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर संभावित असर स्पष्ट रूप से रखता है, और अपने व्यापारिक तथा आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।

हमारी पिछली रिपोर्ट में अगस्त के भारत के व्यापार आंकड़ों पर बताया गया था कि इलेक्ट्रॉनिक्स, लौह अयस्क और पेट्रोलियम उत्पादों की तेज शिपमेंट के चलते निर्यात में जोरदार उछाल आया और व्यापार घाटा घटकर 9.41 अरब डॉलर रह गया। इसमें यह भी रेखांकित किया गया था कि आयात पक्ष में कच्चे पेट्रोलियम व पेट्रोलियम उत्पाद सबसे बड़ी श्रेणी बने रहे, जबकि सोने के आयात में गिरावट से कुल आयात बिल को कुछ राहत मिली।

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