ट्वीट लेखक द्वारा हटा दिया गया था.
लेकिन हमने सब कुछ सहेज लिया 🙂.
Dr Arvind Virmani ने ट्वीट कर यह स्पष्ट किया कि कई भारतीय 2045-50 के लिए ICRIER के 2005 कार्यपत्र और बाद के कई शोध पत्रों की आशंकाओं को मानो पहले ही साकार मान रहे हैं। Virmani ने तर्क दिया कि इस पूर्वानुमानित आर्थिक प्रगति का आज में आभास कर व्यवहार करना अनुचित है, क्योंकि इससे निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है और आर्थिक नीति या निवेश फैसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मत है कि दीर्घकालिक विकास के पूर्वानुमान के बावजूद, वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण कर ही कोई ठोस नीति या रणनीति अपनानी चाहिए। Virmani की इस चेतावनी को नीति निर्माताओं और निवेशकों के लिए मार्गदर्शक के रूप में देखा जा सकता है।
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Virmani पहले भी भारत की आय पर Piketty की धारणाओं से असहमति जता चुके हैं, जो एक प्रमुख अध्ययन में सामने आई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि भारत अभी निम्न आय वर्ग का देश नहीं है और अगले 5-7 वर्षों में ऊच्च-मध्यम आय वर्ग में प्रवेश संभव है, जैसा कि एक अन्य रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था। ये टिप्पणियां उनके वर्तमान दीर्घकालिक विकास संबंधित विचारों की पृष्ठभूमि देती हैं।