भारत के तेल और गैस क्षेत्र में अप्रैल-अगस्त के दौरान उत्पादन, खपत और आयात में गिरावट
वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल से अगस्त अवधि में भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में उत्पादन, खपत, आयात और निर्यात के कई प्रमुख संकेतक सालाना आधार पर कमजोर रहे। फिर भी परिवहन ईंधन की मांग अपेक्षाकृत टिकाऊ दिखती है, क्योंकि मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल की खपत समग्र पेट्रोलियम खपत में गिरावट के बावजूद बढ़ती है।
हाइलाइट्स
- अप्रैल-अगस्त 2023 में कुल पेट्रोलियम उत्पाद उत्पादन 1% घटकर 116.08 MMT और खपत 5% घटकर 95.50 MMT रही।
- कुल कच्चे तेल का प्रसंस्करण 0.04% घटकर 113.01 MMT हुआ, जिसमें NEL Vadinar में 27% गिरावट से निजी रिफाइनरियों की थ्रूपुट मजबूत दबाव में रही।
- कुल तेल आयात 9% घटकर 111.60 MMT, पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात 16% घटकर 21.52 MMT और प्राकृतिक गैस खपत 2% कम होकर 28,607 MMSCM रही।
अप्रैल-अगस्त के परिचालन रुझान
Petroleum and Natural Gas Regulatory Board के मासिक बुलेटिन के अनुसार, कुल पेट्रोलियम उत्पाद उत्पादन 1% सालाना गिरकर 116.08 MMT पर आता है, जबकि कुल खपत 5% घटकर 95.50 MMT रहती है। उत्पादन में गिरावट मुख्य रूप से MS, HSD, ATF, बिटुमेन, LDO, SKO और पेट्रोलियम कोक में कमी से जुड़ी है, हालांकि LPG, ल्यूब्स और LSHS में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज होती है।खपत के स्तर पर LPG, बिटुमेन, LDO, नैफ्था और पेट्रोलियम कोक में कमी समग्र दबाव बनाती है। इसके विपरीत, प्रमुख परिवहन ईंधनों में मोटर स्पिरिट की खपत 7% और हाई-स्पीड डीजल की 5% बढ़ती है, जबकि ATF की खपत लगभग स्थिर, 0.5% की बढ़त के साथ रहती है और FO व LSHS की खपत 10% बढ़ती है।
कुल कच्चे तेल का प्रसंस्करण 0.04% घटकर 113.01 MMT पर आता है। निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों में 3% की गिरावट, खासकर NEL Vadinar में 27% की कमी, कुल प्रसंस्करण पर दबाव डालती है, जबकि PSU रिफाइनरियां 72.40 MMT के साथ 1% वृद्धि दर्ज करती हैं और JV रिफाइनरी थ्रूपुट 13% बढ़ता है।
प्रमुख रिफाइनरी समूहों में IOCL 1% की वृद्धि दर्ज करता है, जिसमें Koyali और Digboi की अधिक थ्रूपुट मदद करती है। वहीं HPCL और JV, CPCL, NRL तथा RIL के प्रदर्शन में मिश्रित रुझान दिखते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समग्र गिरावट का मुख्य कारण निजी क्षेत्र की कमजोर थ्रूपुट रहती है।
व्यापार प्रवाह और मांग पर असर
तेल व्यापार के मोर्चे पर कुल आयात 9% घटकर 111.60 MMT पर आता है, जिसका मुख्य कारण पेट्रोलियम उत्पाद आयात में 50% की तेज गिरावट है; कच्चे तेल का आयात भी 0.4% कम होता है। पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात 16% घटकर 21.52 MMT पर आता है और शुद्ध तेल आयात 7% कम होकर 90.07 MMT दर्ज होता है।प्राकृतिक गैस खंड में सकल और शुद्ध उत्पादन क्रमशः 4% घटकर 14,074 MMSCM और 13,884 MMSCM पर आता है, जो तटीय और अपतटीय दोनों क्षेत्रों में कम उत्पादन को दर्शाता है। इसी अवधि में कुल प्राकृतिक गैस खपत 2% घटकर 28,607 MMSCM रहती है, जो बताती है कि ऊर्जा मांग पूरी तरह कमजोर नहीं होती, लेकिन औद्योगिक और व्यापक ईंधन उपयोग में सावधानी बनी रहती है।
ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने पर हमारी पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि केंद्र सरकार इस संभावना पर विचार कर रही है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने के लिए राज्यों की सहमति निर्णायक शर्त है। उस लेख में यह भी रेखांकित किया गया था कि मौजूदा जीएसटी दरों में बड़े बदलाव की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है और सरकार दरों में फेरबदल के बजाय करदाता आधार बढ़ाने व जीएसटी परिषद की 12 सदस्यीय स्थायी समिति जैसे संस्थागत कदमों पर जोर दे रही है।
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