Ashutosh Sureka

RBI ने सेवा और अवसंरचना क्षेत्रों के कारोबारी रुझान आकलन के लिए 51वां SIOS सर्वे शुरू किया

RBI ने सेवा और अवसंरचना क्षेत्रों के कारोबारी रुझान आकलन के लिए 51वां SIOS सर्वे शुरू किया
RBI का नया SIOS सर्वे

भारतीय सेवा और अवसंरचना क्षेत्रों में मौजूदा कारोबारी स्थितियों और निकट अवधि की अपेक्षाओं का आकलन करने के लिए Reserve Bank of India ने अक्टूबर-दिसंबर 2026 संदर्भ अवधि के लिए तिमाही Services and Infrastructure Outlook Survey का 51वां दौर शुरू किया है। यह सर्वे Q3:2026-27 की व्यावसायिक स्थिति के साथ Q4:2026-27 की अपेक्षाओं और Q1:2027-28 तथा Q2:2027-28 के प्रमुख मानकों के दृष्टिकोण को भी कवर करता है।

हाइलाइट्स

  • RBI ने 51वां SIOS सर्वे शुरू किया, जो सेवा और अवसंरचना कंपनियों की मांग, वित्तीय स्थिति, रोजगार और कीमतों पर फोकस करेगा।
  • Q3:2026-27 और Q4:2026-27 के लिए भी कंपनियों की कारोबारी अपेक्षाओं का आकलन सर्वे के माध्यम से किया जाएगा।
  • सर्वे संचालन प्राधिकरण M/s Genesis Management & Market Research Pvt. Ltd. को मिला, निष्कर्ष RBI की वेबसाइट पर नियमित रूप से जारी होंगे।

सर्वे का दायरा और भागीदारी प्रक्रिया

RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह तिमाही सर्वे भारत की चयनित सेवा और अवसंरचना कंपनियों से गुणात्मक प्रतिक्रियाओं के आधार पर मांग, वित्तीय स्थिति, रोजगार हालात और कीमतों की स्थिति जैसे संकेतकों का आकलन करता है। सर्वे का उद्देश्य चालू तिमाही की कारोबारी स्थिति के साथ अगली तिमाही के लिए कंपनियों की अपेक्षाओं को समझना है।

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि सर्वे के निष्कर्ष नियमित रूप से उसकी वेबसाइट पर संक्षिप्त रूप में जारी किए जाते हैं और उत्तरदाताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती। अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए इस सर्वे के संचालन का प्राधिकरण M/s Genesis Management & Market Research Pvt. Ltd. को RBI की ओर से दिया गया है।

एजेंसी चयनित कंपनियों से संपर्क करेगी, लेकिन सेवा और अवसंरचना क्षेत्रों की अन्य कंपनियों को भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इच्छुक कंपनियां बैंक की वेबसाइट पर 'Survey' उप-शीर्षक के तहत प्रश्नावली डाउनलोड कर सकती हैं और विधिवत प्रमाणित भरी हुई प्रश्नावली उसमें दिए गए संपर्क विवरण के अनुसार ई-मेल कर सकती हैं।

क्षेत्रीय संकेतकों पर संभावित प्रभाव

यह अभ्यास सेवा और अवसंरचना क्षेत्रों में कारोबारी भावना का एक अग्रिम संकेतक उपलब्ध कराता है, जिससे मांग की दिशा, लागत दबाव, रोजगार रुझान और वित्तीय परिस्थितियों पर नजदीकी नजर रखने में मदद मिलती है। ऐसे गुणात्मक सर्वे नीति निर्माताओं के लिए औपचारिक आंकड़ों से पहले क्षेत्रीय गतिविधि के संकेत जुटाने का माध्यम बनते हैं।

Q3:2026-27 और Q4:2026-27 के आकलन के साथ अगले दो तिमाहियों के दृष्टिकोण को शामिल करना इस सर्वे को निकट और मध्यम अवधि के कारोबारी रुझानों के लिए उपयोगी बनाता है। प्रश्नों या स्पष्टीकरण के लिए RBI ने सांख्यिकी और सूचना प्रबंधन विभाग, Division of Enterprise Surveys, Bandra-Kurla Complex, मुंबई स्थित अपने कार्यालय के संपर्क विवरण भी जारी किए हैं।

हमारी पिछली रिपोर्ट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की उन चेतावनियों पर चर्चा की गई थी जिनमें वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के और सख्त होने, ऊंचे लीवरेज तथा खिंचे हुए इक्विटी मूल्यांकन से बैंकों और गैर-बैंक वित्तीय संस्थानों पर दबाव बढ़ने का जोखिम बताया गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि एआई निवेश चक्र में संभावित सुस्ती और साइबर जोखिम जैसे कारक परिसंपत्ति कीमतों में तेज पुनर्मूल्यांकन और बाजार अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं, जबकि भारत पर असर मुख्यतः बाहरी झटकों और पूंजी प्रवाह के जरिये आ सकता है।

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