फरवरी 2025 में U.S. से 300 से अधिक भारतीयों के निर्वासन के बाद शुरू हुई जांच अब अवैध आव्रजन नेटवर्क के कथित वित्तीय और परिचालन ढांचे तक पहुंच रही है। इसी क्रम में ईडी ने दिल्ली के टिकटिंग एजेंट तरुण खोसला को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया है, जिस पर दक्षिण और मध्य अमेरिका के रास्ते लोगों को अवैध रूप से U.S. भेजने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है।
हाइलाइट्स
- ईडी ने 23.10.2026 को तरुण खोसला को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया, अदालत ने उसे 30.10.2026 तक ईडी हिरासत में भेजा।
- जांच में 15.12.2025 को 5.41 करोड़ रुपये की संपत्ति और 18-19.12.2025 को 4.62 करोड़ रुपये नकद, 5.9 किलोग्राम सोना, 313 किलोग्राम चांदी जब्त की गई।
- BJ International के बैंक खाते में 2022-23 से 2024-25 के बीच 414 नकद-क्रेडिट लेनदेन में 30.38 करोड़ रुपये जमा हुए, जो अवैध रूट के जरिए कमाए गए थे।
जांच में नेटवर्क और जब्ती का दायरा
जैसा कि Enforcement Directorate ने कहा, जालंधर जोनल कार्यालय ने 23.10.2026 को तरुण खोसला को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत गिरफ्तार किया, और विशेष पीएमएलए अदालत ने उसे 30.10.2026 तक ईडी हिरासत में भेजा है। यह मामला उन भारतीयों से जुड़ा है जिन्हें फरवरी 2025 में मैक्सिको सीमा के रास्ते अवैध प्रवेश के बाद U.S. से वापस भेजा गया था।जांच पंजाब पुलिस और हरियाणा पुलिस की विभिन्न एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। एजेंसी के अनुसार, इच्छुक यात्रियों को वैध माध्यम से U.S. भेजने का झांसा दिया जाता था, लेकिन उन्हें कथित तौर पर तथाकथित डंकी रूट पर भेजा जाता था, जिसमें दक्षिण और मध्य अमेरिका के कई देशों की सीमाएं खतरनाक और अवैध रास्तों से पार कराई जाती थीं, और इसके लिए प्रति व्यक्ति करीब 30 लाख रुपये से 60 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।
ईडी ने बताया कि 09.07.2025 और 11.07.2025 को 19 ठिकानों पर तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, और निकारागुआ तथा इथियोपिया से संबंधित फर्जी इमिग्रेशन और वीजा स्टांप बरामद हुए थे। इसके बाद 15.12.2025 को एजेंसी ने लगभग 5.41 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से संलग्न की थीं, जिनमें कृषि भूमि, आवासीय और व्यावसायिक परिसंपत्तियां तथा बैंक खातों की शेष राशि शामिल थी।
18.12.2025 और 19.12.2025 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई स्थानों पर की गई आगे की तलाशी में तरुण खोसला से जुड़े परिसरों से 4.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 5.9 किलोग्राम सोने की ईंटें और सिक्के, तथा करीब 313 किलोग्राम चांदी की ईंटें जब्त की गई थीं, जिनका कुल मूल्य 19.14 करोड़ रुपये बताया गया। अन्य परिसरों से 50 से अधिक मूल पासपोर्ट, लेनदेन से जुड़ी डायरी, संपत्ति दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद हुए।
संचालन मॉडल और कारोबारी असर
जांच में तरुण खोसला को इस नेटवर्क का प्रमुख सुगमकर्ता बताया गया है, जो पंजाब और हरियाणा के कई एजेंटों के साथ काम करता था। एजेंसी के मुताबिक, ये एजेंट यात्रियों से पासपोर्ट और धनराशि लेकर उसे दिल्ली में सौंपते थे, जिसके बाद वह गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और एल साल्वाडोर जैसे दक्षिण अमेरिकी ट्रांजिट देशों के लिए वीजा और हवाई टिकट की व्यवस्था करता था और आगे अवैध मार्ग से U.S. सीमा तक पहुंचाने की प्रक्रिया को समन्वित करता था।ईडी का कहना है कि जब्त मोबाइल फोन से मिले चैट रिकॉर्ड यह संकेत देते हैं कि वह इमिग्रेशन क्लीयरेंस फिक्सर के रूप में भी काम करता था। अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के साथ कथित बातचीत में विदेशी हवाई अड्डों पर समन्वय, इमिग्रेशन क्लीयरेंस के लिए धन संग्रह, टिकट सुविधा, यात्रियों की हैंडलिंग और U.S. डॉलर में भुगतान जैसे पहलू सामने आए हैं, जबकि "OK to Board" जैसे निर्देश और एयरलाइन या इमिग्रेशन कर्मियों के साथ तालमेल उसके परिचालन नियंत्रण की ओर इशारा करते हैं।
एजेंसी ने यह भी कहा कि उसके विदेशी संपर्कों में मैक्सिको का "Mike", ब्राजील का "Ali" और मैक्सिको की एक अन्य संपर्क "Kristi" शामिल थे, जो कथित तौर पर डंकी रूट से लोगों की आवाजाही और संबंधित भुगतानों का प्रबंधन करते थे। जांच में यह भी पाया गया कि उसकी प्रोप्राइटरशिप फर्म M/s BJ International के बैंक खाते में वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान 414 नकद-क्रेडिट लेनदेन के जरिये 30.38 करोड़ रुपये जमा हुए।
अब तक की जांच के आधार पर एजेंसी इस व्यवस्था को कई वर्षों से चल रहे एक सुव्यवस्थित अवैध कारोबार के रूप में देख रही है, जिसमें आम लोगों को झांसा देकर बड़े कमीशन कमाए जाते थे। मामले में आगे की जांच जारी है।
हमारी पिछली रिपोर्ट में रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े कथित धनशोधन मामले में ईडी द्वारा Ocean Seven Buildtech Private Limited (OSBPL) और उससे जुड़े पक्षों की 136.42 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों की अस्थायी कुर्की पर अपडेट दिया गया था। उस लेख में खरीदारों से जुटाई गई रकम के कथित दुरुपयोग, परियोजनाओं के विकास न होने और एफआईआर के बाद कुछ भूमि के हस्तांतरण को भी कुर्की दायरे में लाए जाने जैसे निष्कर्षों का उल्लेख था।
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